भारत में X द्वारा ‘Cockroach Janta Party’ अकाउंट ब्लॉक किए जाने के बाद बड़ा राजनीतिक और डिजिटल विवाद खड़ा हो गया है। संस्थापक अभिजीत दिपके के पुराने AAP कनेक्शन, भाजपा विरोधी सोशल मीडिया अभियान, वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट, विदेशी फॉलोअर्स के दावे और राजनीतिक डिजिटल नैरेटिव को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

भारत के डिजिटल और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों “Cockroach Janta Party” यानी CJP को लेकर जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने भारत में इस व्यंग्यात्मक अकाउंट की पहुंच रोक दी है। भारतीय यूज़र्स को अकाउंट खोलने पर “withheld in IN in response to a legal demand” का संदेश दिखाई दे रहा है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब CJP ने इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स के मामले में भारतीय जनता पार्टी को पीछे छोड़ते हुए लगभग 13 मिलियन फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया था।

इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया सेंसरशिप, राजनीतिक प्रचार, विदेशी प्रभाव और डिजिटल नैरेटिव वॉर जैसे मुद्दों को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने X पर कार्रवाई के बाद “As expected” लिखकर प्रतिक्रिया दी और दावा किया कि उनके इंस्टाग्राम अकाउंट तक पहुंच बनाने की भी कोशिश की गई।



सिर्फ कुछ दिन पहले शुरू हुई इस डिजिटल मुहिम ने बेहद कम समय में देशभर के युवाओं के बीच बड़ी लोकप्रियता हासिल कर ली। 30 वर्षीय बोस्टन-स्थित छात्र अभिजीत दिपके द्वारा शुरू किया गया यह अभियान सुप्रीम कोर्ट के एक जज की उस टिप्पणी से प्रेरित बताया गया, जिसमें सिस्टम का दुरुपयोग करने वालों को “cockroaches” कहा गया था। इसी टिप्पणी को आधार बनाकर बनाए गए व्यंग्यात्मक कंटेंट ने देखते ही देखते वायरल रूप ले लिया। X पर अकाउंट ने दो लाख से अधिक फॉलोअर्स जुटा लिए, जबकि इंस्टाग्राम पर इसकी लोकप्रियता विस्फोटक तरीके से बढ़ी।

CJP ने बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक, युवा असंतोष और राजनीतिक व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए एक प्रकार का डिजिटल “मेनिफेस्टो” तैयार किया। समर्थकों ने इसे युवाओं की आवाज बताया, जबकि आलोचकों ने इसे एक सुनियोजित राजनीतिक डिजिटल अभियान करार दिया। कुछ लोगों ने तो इसे अमेरिका से संचालित “राजनीतिक हस्तक्षेप” तक बताया।

विवाद तब और गहरा गया जब सोशल मीडिया पर अभिजीत दिपके के पुराने पोस्ट वायरल होने लगे। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दिपके वर्ष 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेन टीम से जुड़े रहे थे। बताया गया कि उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान मीम-आधारित राजनीतिक प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी।



इसी बीच मनीष सिसोदिया को धन्यवाद देते हुए उनका एक पुराना पोस्ट तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने लिखा था, “No distance will ever weaken my commitment to AAP.” एक अन्य पोस्ट में दिपके ने मनीष सिसोदिया और आतिशी का धन्यवाद करते हुए लिखा था कि उनके भरोसे, मार्गदर्शन और अवसरों की वजह से वह यहां तक पहुंच पाए हैं। इन पोस्ट्स के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल तेज हो गया कि क्या CJP वास्तव में एक स्वतंत्र व्यंग्यात्मक मंच है या फिर विपक्षी राजनीति से जुड़ा कोई अप्रत्यक्ष डिजिटल अभियान।

कई रिपोर्ट्स में अभिजीत दिपके को AAP की “डिजिटल मशीनरी” या पूर्व सोशल मीडिया कार्यकर्ता के रूप में भी वर्णित किया गया। हालांकि अब तक ऐसा कोई सार्वजनिक या आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि आम आदमी पार्टी सीधे तौर पर CJP को संचालित कर रही है या उसे फंडिंग दे रही है।

लोगों के संदेह को सबसे ज्यादा बल उस समय मिला जब CJP के इंस्टाग्राम अभियान में भाजपा अकाउंट को अनफॉलो करने की अपील वाले पोस्ट वायरल हुए। CJP समर्थकों द्वारा भाजपा के “world’s largest party” वाले दावे का मजाक उड़ाते हुए यह प्रचार किया गया कि एक व्यंग्यात्मक अकाउंट ने फॉलोअर्स के मामले में भाजपा को पीछे छोड़ दिया है। सोशल मीडिया पर कई स्क्रीनशॉट और पोस्ट शेयर किए गए जिनमें भाजपा को अनफॉलो करने की अपील दिखाई दी। इसके बाद आलोचकों ने आरोप लगाया कि यह केवल व्यंग्य नहीं बल्कि सीधे तौर पर राजनीतिक डिजिटल मोबिलाइजेशन है।






इस विवाद को और हवा तब मिली जब सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स ने दावा करना शुरू किया कि CJP के बड़ी संख्या में फॉलोअर्स पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्किस्तान जैसे देशों से हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है, लेकिन इसने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध तथा संवेदनशील बना दिया है।

दूसरी ओर, अभिजीत दिपके और उनके समर्थकों का कहना है कि CJP किसी राजनीतिक दल का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि बेरोजगारी, ऑनलाइन संस्कृति और राजनीतिक निराशा से उपजे युवाओं के गुस्से का डिजिटल व्यंग्यात्मक आंदोलन है। लेकिन जिस तरह इसकी रणनीति, मीम-आधारित प्रचार, वायरल ब्रांडिंग और राजनीतिक संदेश बेहद पेशेवर तरीके से सामने आए, उसने राजनीतिक हलकों में गंभीर चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

भारत में X द्वारा अकाउंट रोके जाने के बाद यह मामला अब केवल सोशल मीडिया विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। यह डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक व्यंग्य की सीमाएं, ऑनलाइन प्रचार तंत्र और विदेशी प्रभाव जैसे बड़े सवालों से जुड़ चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद भारतीय राजनीति और सोशल मीडिया रेगुलेशन दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण केस स्टडी बन सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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