माताओं-बहनों के सम्मान में झुका देश- महिला आरक्षण बिल को पीएम ने बताया राष्ट्र का मान।
संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव, 2029 से लागू होगा महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद परिसर में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संदर्भ में मीडिया को संबोधित करते हुए।
महिला आरक्षण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम: संसद में ऐतिहासिक विधायी प्रक्रिया का आगाह
नई दिल्ली: भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में नारी शक्ति के सशक्तिकरण की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। संसद के विशेष सत्र के आरंभ होने के साथ ही केंद्र सरकार महिला आरक्षण से संबंधित तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस विधायी प्रक्रिया का उद्देश्य वर्ष 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को धरातल पर उतारना है। संसद की विशेष बैठक शुरू होने से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्र के सम्मान और नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक निर्णायक मोड़ करार दिया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का वास्तविक गौरव है और सरकार इसी संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक अवसर पर ऋग्वेद के एक पवित्र श्लोक का उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को संदेश दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि यह विशेष सत्र केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों को सुरक्षित करने का एक पावन प्रयास है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित तीन संशोधन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों के आरक्षण को सुनिश्चित करना है। इस कानून के कार्यान्वयन के बाद भारतीय राजनीति की संरचना में व्यापक और सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस विधायी कार्ययोजना के अंतर्गत सबसे महत्वपूर्ण पहलू लोकसभा की सीटों की संख्या में प्रस्तावित विस्तार है। केंद्र सरकार ने सांसदों के साथ साझा किए गए 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026' के मसौदे में लोकसभा की कुल सदस्य संख्या को वर्तमान से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इस विस्तार में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व शामिल होगा। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या 815 तक सीमित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व के लिए 35 सदस्यों का प्रावधान किया गया है, जिनका चुनाव संसद द्वारा विधिवत रूप से निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
वर्तमान में लोकसभा की संरचना को देखें तो राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य चुनकर आते हैं। हालांकि, परिसीमन आयोग द्वारा निर्धारित कुल संख्या 543 है। सीटों के इस विस्तार के लिए जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाना है। विधेयक में प्रस्तावित एक अन्य तकनीकी संशोधन 'जनसंख्या' की परिभाषा से संबंधित है। यह संशोधन संसद को वह अधिकार प्रदान करेगा जिसके तहत यह तय किया जा सके कि भविष्य में सीटों की संख्या में विस्तार के लिए किन विशिष्ट आंकड़ों और पैमानों को आधार माना जाएगा। यह प्रक्रिया 2029 के आम चुनावों से पूर्व महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में अनिवार्य कदम मानी जा रही है।
संसद के इस विशेष सत्र की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह संशोधन भारतीय लोकतंत्र की भविष्य की दिशा निर्धारित करेगा। लोकसभा सीटों के विस्तार और महिला आरक्षण के समन्वय से न केवल विधायी प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी भी और अधिक सशक्त होगी। यह ऐतिहासिक कदम भारतीय शासन प्रणाली में समावेशिता के एक नए युग का सूत्रपात माना जा रहा है, जो आने वाले दशकों में देश के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
