अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित ‘एपस्टीन फाइल्स’ का साया अब भारतीय राजनीति तक पहुंच गया है। अमेरिकी वित्तीय कारोबारी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के हालिया पुनर्समक्ष आने के बाद देश की संसद में भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई। इन दस्तावेजों में विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों के नामों और ईमेल संवादों का उल्लेख होने की बात सामने आई है, जिसके बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई।

लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए संकेत दिया कि उनका नाम भी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज है। इस उल्लेख के बाद राजनीतिक वातावरण गरमा गया और मामला तुरंत राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया।


क्या हैं ‘एपस्टीन फाइल्स’?

‘एपस्टीन फाइल्स’ उन दस्तावेजों, ईमेल आदान-प्रदान और संपर्क सूचियों को कहा जाता है जो अमेरिकी न्याय विभाग की जांच के दौरान सार्वजनिक दायरे में आए। इन दस्तावेजों में जेफ्री एपस्टीन के संपर्क में आए कई राजनेताओं, उद्योगपतियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के नाम दर्ज बताए गए हैं। हालांकि, किसी नाम का उल्लेख होना स्वयं में आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जाता।


हरदीप सिंह पुरी का क्या है संबंध?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका एपस्टीन से संपर्क केवल औपचारिक और पेशेवर था। पुरी के अनुसार, न्यूयॉर्क में अपने राजनयिक कार्यकाल के दौरान वे अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान (International Peace Institute – IPI) के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में 3–4 बार एपस्टीन से मिले थे। उन्होंने अपने बयान में कहा कि ये मुलाकातें किसी निजी या सामाजिक संबंध का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों और आधिकारिक बैठकों तक सीमित थीं। पुरी ने इस आरोप को “आधारहीन” बताते हुए इसे राजनीतिक “भ्रम फैलाने” की कोशिश करार दिया और आलोचकों से संबंधित ईमेल रिकॉर्ड पढ़ने की सलाह दी।


मुख्य स्पष्टीकरण:

  • मुलाकातों की प्रकृति: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमित और औपचारिक बातचीत।
  • कोई आपराधिक संलिप्तता नहीं: नाम का उल्लेख अपराध में भागीदारी का प्रमाण नहीं।
  • राजनीतिक संदर्भ: संसद में आरोप-प्रत्यारोप के बीच दिया गया स्पष्ट खंडन।


संसद में बढ़ी राजनीतिक गर्माहट:

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब संसद का सत्र चल रहा है और विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश में है। राहुल गांधी के बयान के बाद सत्ता पक्ष ने इसे राजनीतिक हमला बताया, जबकि विपक्ष ने पारदर्शिता की मांग दोहराई। हालांकि अब तक किसी भी आधिकारिक एजेंसी द्वारा हरदीप सिंह पुरी के खिलाफ किसी प्रकार की आपराधिक जांच या आरोप की पुष्टि नहीं की गई है।


व्यापक परिप्रेक्ष्य:

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में कई प्रतिष्ठित नामों का उल्लेख सामने आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन फाइल्स में नाम का होना मात्र संपर्क या संवाद को दर्शाता है, न कि अनिवार्य रूप से किसी गैरकानूनी गतिविधि में भागीदारी को।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के नाम जब विवादित दस्तावेजों में सामने आते हैं, तो राजनीतिक विमर्श किस दिशा में मुड़ता है। फिलहाल हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट शब्दों में किसी भी प्रकार की गलत संलिप्तता से इनकार किया है और इसे निराधार आरोप बताया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी आपराधिक कड़ी की पुष्टि नहीं हुई है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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