बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद रातों-रात बदला नाम ; क्या सच में बदल गया ‘मस्जिद पाड़ा रोड’?
पश्चिम बंगाल में ‘मस्जिद पाड़ा रोड’ का नाम कथित रूप से बदलकर ‘नेताजी पल्लী रोड’ किए जाने का दावा सामने आया है। भाजपा समर्थकों द्वारा सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में किए गए इस अनौपचारिक बदलाव ने सियासी बहस छेड़ दी है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर किसी आधिकारिक पुष्टि की जानकारी नहीं है।

पश्चिम बंगाल में सड़क का नाम बदलने का दावा
पश्चिम बंगाल में हाल ही में सामने आए एक कथित घटनाक्रम ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है, जहाँ भाजपा समर्थकों द्वारा एक सड़क का नाम बदलने का दावा किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर ‘मस्जिद पाड़ा रोड’ का नाम बदलकर ‘नेताजी पल्लী रोड’ किए जाने की बात सामने आई है, जिसे स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में किया गया बताया जा रहा है।
सूत्रों और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में यह दावा किया गया है कि हालिया चुनावी परिणामों के बाद भाजपा समर्थकों ने इस परिवर्तन को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि यह कदम क्षेत्रीय स्तर पर जीत के उत्सव और राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत को प्रतीकात्मक रूप से सम्मानित किया गया है।
BJP workers renames Masjid Para Road to Netaji Pally Road. They say it right— Bengal belongs to Netaji Subhash Chandra Bose. pic.twitter.com/zsXSEg1Ecf
— Sudhanidhi Bandyopadhyay (@SudhanidhiB) May 5, 2026
स्थानीय भाजपा मंडल-4 अध्यक्ष और निवासी नितीश मंडल ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि इस सड़क का नाम बदलने की मांग पिछले 10 से 15 वर्षों से उठाई जा रही थी, लेकिन प्रशासनिक मंजूरी कभी नहीं मिली। उनके अनुसार, जब उनकी पार्टी को क्षेत्र में जनसमर्थन मिला, तो स्थानीय लोगों ने स्वयं इस परिवर्तन को आगे बढ़ाया। उन्होंने इसे जनता की इच्छा का परिणाम बताया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन या नगरपालिका की ओर से किसी भी प्रकार की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है कि सड़क का नाम आधिकारिक रूप से बदला गया है। ऐसे में यह परिवर्तन फिलहाल एक अनौपचारिक और प्रतीकात्मक पहल माना जा रहा है।
गौरतलब है कि सुभाष चंद्र बोस का नाम देशभर में विभिन्न स्थानों, संस्थानों और मार्गों से जुड़ा हुआ है और वे भारतीय राजनीति एवं इतिहास में एक अत्यंत सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी उनकी विरासत को लेकर विभिन्न दल समय-समय पर अपनी-अपनी राजनीतिक अभिव्यक्तियाँ प्रस्तुत करते रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक स्थानों के नाम परिवर्तन जैसी कार्रवाइयाँ किस हद तक औपचारिक प्रक्रिया और प्रशासनिक अनुमति के दायरे में आती हैं, और किस हद तक यह केवल स्थानीय या प्रतीकात्मक राजनीतिक अभिव्यक्ति का हिस्सा होती हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
