पश्चिम बंगाल की BJP सरकार द्वारा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के मीडिया से बातचीत पर लगाए गए प्रतिबंध ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार के नए सर्कुलर पर TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कुचलने और असहमति दबाने का आरोप लगाया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। राज्य में हाल ही में बनी भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा जारी एक प्रशासनिक आदेश ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सरकारी महकमों तक तीखी बहस छेड़ दी है। राज्य सरकार ने एक नए सर्कुलर के जरिए सरकारी अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और विभिन्न सरकारी संस्थानों से जुड़े कर्मचारियों के मीडिया से संवाद करने, सार्वजनिक टिप्पणी देने और सरकारी दस्तावेज साझा करने पर कड़ी रोक लगा दी है। इस आदेश के सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी ने भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने और असहमति की आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाया है।

राज्य सरकार के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा बुधवार रात जारी किए गए इस नोटिफिकेशन पर मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के हस्ताक्षर हैं। “Dissemination of Information by any member of the All India Service, West Bengal Civil Service, West Bengal Police Service and other employees working under the Government of West Bengal” शीर्षक वाले इस सर्कुलर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बिना सरकारी अनुमति किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सूचना, दस्तावेज या प्रशासनिक जानकारी मीडिया के साथ साझा करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध केवल आईएएस, डब्ल्यूबीसीएस और डब्ल्यूपीबीएस अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सुधार सेवाओं के कर्मचारियों, राज्य सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों, बोर्डों, नगरपालिकाओं, नगर निगमों और विभिन्न स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों पर भी लागू होगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को निजी मीडिया कार्यक्रमों में भाग लेने या केंद्र सरकार प्रायोजित मीडिया आयोजनों से जुड़ने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

राज्य सरकार ने इस आदेश को अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968, पश्चिम बंगाल सेवा (कर्तव्य, अधिकार और दायित्व) नियम, 1980 तथा पश्चिम बंगाल सरकारी सेवक आचरण नियम, 1959 के प्रावधानों के अनुरूप बताया है। सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने और संवेदनशील सरकारी सूचनाओं के अनधिकृत प्रसार को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

हालांकि, विपक्ष ने इस फैसले को लेकर भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आदेश प्रशासनिक अनुशासन नहीं, बल्कि “चुप्पी थोपने” की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आलोचना को सहन नहीं कर पा रही और इसलिए कर्मचारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को व्यवस्थित तरीके से सीमित किया जा रहा है।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि सर्कुलर में “Complete prohibition” जैसे शब्द केवल चेतावनी नहीं, बल्कि पूरे बंगाल में सरकारी कर्मचारियों को खामोश रखने का संदेश हैं। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों को प्रेस से बात करने, लेख लिखने, मीडिया बहसों में भाग लेने और यहां तक कि केंद्र या राज्य सरकार की आलोचना करने से भी रोका जा रहा है। उनके अनुसार यह आदेश लोकतांत्रिक मूल्यों और मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।

टीएमसी नेता ने भाजपा पर “रिमोट कंट्रोल गवर्नेंस” चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में बैठे राजनीतिक नेतृत्व के प्रति “पूर्ण आज्ञाकारिता” सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने इसे स्वतंत्र अभिव्यक्ति का दमन और असहमति को नियंत्रित करने की कोशिश बताया।

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनावों के बाद पहली बार भाजपा की सरकार बनी है और सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद संभाला है। सरकार बनने के बाद राज्य में कई प्रशासनिक और नीतिगत बदलाव किए गए हैं, जबकि दूसरी ओर राजनीतिक तनाव और चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं को लेकर भी माहौल लगातार गरम बना हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आदेश आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में और अधिक टकराव पैदा कर सकता है। एक ओर सरकार इसे प्रशासनिक नियंत्रण और गोपनीयता बनाए रखने का आवश्यक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में पेश कर रहा है। ऐसे में यह मुद्दा केवल प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक दिशा और सत्ता बनाम अभिव्यक्ति की बहस का केंद्र बनता जा रहा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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