बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल में बीजेपी को बहुमत मिलने की भविष्यवाणी, सुवेंदु अधिकारी और समिक भट्टाचार्य ने सरकार बनाने का दावा किया।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्ष 2026 का विधानसभा चुनाव एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है, जिसने राज्य के तीन दशक से अधिक के चुनावी इतिहास को पीछे छोड़ दिया है। मतदान के अंतिम चरण की समाप्ति के साथ ही सामने आए एग्जिट पोल के रुझानों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खेमे में उत्सव का माहौल बना दिया है, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इन आंकड़ों को सिरे से खारिज कर रही है। राज्य की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता है, और अधिकांश सर्वेक्षणों ने इस बार बीजेपी को न केवल बहुमत के पार, बल्कि 180 से 200 सीटों के करीब पहुंचते हुए दिखाया है। इस अनुमान ने बंगाल की सियासी गलियों में 'खेला हो गया' के नारों को एक नया अर्थ दे दिया है।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने एग्जिट पोल के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'जनता बनाम ममता' का चुनाव करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस बार बंगाल की जनता ने खुद चुनाव की कमान संभाल रखी थी और टीएमसी के कथित भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ मतदान किया है। इसी स्वर में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी बड़ा दावा करते हुए कहा कि बीजेपी 180 से अधिक सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जा रही है। सुवेंदु, जो स्वयं भवानीपुर और नंदीग्राम जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों से मैदान में हैं, का मानना है कि इस बार बंगाल में सत्ता परिवर्तन की लहर बहुत गहरी है और यह केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस इन रुझानों को मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा मान रही है। टीएमसी सांसद डोला सेन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मतदान प्रतिशत में हुई 13 प्रतिशत की भारी वृद्धि टीएमसी के पक्ष में है। उन्होंने चुनाव आयोग की मतदाता सूची में हुई गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि लाखों मतदाताओं के नाम काटे गए थे, जिसके खिलाफ ममता बनर्जी ने कानूनी लड़ाई लड़ी। टीएमसी का तर्क है कि जिन लोगों के नाम सूची में वापस आए, उन्होंने भारी उत्साह के साथ अपनी सरकार को बचाने के लिए वोट दिया है। पार्टी का मानना है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा तैयार किया गया नैरेटिव जमीन पर काम नहीं करेगा और ममता बनर्जी एक बार फिर सत्ता में वापसी करेंगी।

चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार पश्चिम बंगाल में मतदान का स्तर ऐतिहासिक रहा है। दूसरे चरण में 91.66 प्रतिशत और पहले चरण में 93.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिससे कुल औसत 92.47 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह 2021 के 84.72 प्रतिशत के रिकॉर्ड से कहीं अधिक है। राजनीतिक विशेषज्ञ इस भारी मतदान को 'एंटी-इंकम्बेंसी' या 'प्रो-इंकम्बेंसी' के रूप में देख रहे हैं, लेकिन अंतिम सत्य मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा। कानूनी रूप से, चुनाव के दौरान मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने के विवाद ने इस चुनाव को अदालती चौखट तक भी पहुंचाया था, जो इस चुनावी प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है।

जैसे-जैसे मतगणना की घड़ी समीप आ रही है, बंगाल की जनता और पूरे देश की नजरें कोलकाता की ओर टिकी हैं। क्या बीजेपी वाकई 200 पार के अपने दावे को सच कर पाएगी, या ममता बनर्जी एक बार फिर सभी अनुमानों को गलत साबित करते हुए अपनी सत्ता बचा ले जाएंगी? यह चुनाव केवल सीटों की जीत-हार नहीं, बल्कि बंगाल की भविष्य की दिशा और वहां की राजनीतिक कार्यप्रणाली का भी फैसला करेगा। एग्जिट पोल के आंकड़ों ने फिलहाल बीजेपी को बढ़त दी है, लेकिन बंगाल की राजनीति की तासीर हमेशा से चौंकाने वाली रही है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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