पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर मतदाता सूची में विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) ने तूल पकड़ा है। मालदा और उत्तर बंगाल के अन्य जिलों में इस प्रक्रिया के खिलाफ भारी प्रदर्शन हुए, जिसने राष्ट्रीय राजमार्ग 12 समेत कई सड़कों को अवरुद्ध कर दिया और यातायात व लॉजिस्टिक सेवाओं पर गंभीर प्रभाव डाला।

स्थानीय लोगों का कहना है कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इस आरोप को लेकर मालदा के कलियाचक क्षेत्र में प्रदर्शनकारी न्यायिक अधिकारियों के कार्यालय के सामने इकट्ठा हो गए और सात अधिकारियों, जिनमें तीन महिलाएं शामिल थीं, को कई घंटों तक घेर रखा। अधिकारी उन आपत्तियों का निपटारा कर रहे थे जो मतदाता सूची से हटाए गए नामों से संबंधित थीं। सुरक्षा बलों ने देर रात अधिकारियों को सुरक्षित निकालने में सफलता पाई।

इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरा संज्ञान लिया और इसे न्यायिक अधिकारियों को डराने और चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने का एक "निर्दयी प्रयास" करार दिया। अदालत ने अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया, चुनाव आयोग को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और मामले की जांच के लिए CBI या NIA की संस्तुति की। साथ ही, उच्च अधिकारियों जैसे मुख्य सचिव और DGP को भी उनकी कथित निष्क्रियता पर जवाब देने का नोटिस जारी किया गया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर जवाब देते हुए राजनीतिक उद्देश्य होने का संकेत दिया और मतदाता नामों को शामिल करने तथा हटाए गए नामों को ठीक करने के लिए उठाए गए कदमों पर जोर दिया। वहीं, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को कानून व्यवस्था की विफलता और विरोध प्रदर्शनों के बढ़ने का जिम्मेदार ठहराया।

मालदा से परे भी इस विरोध प्रदर्शन की लहर फैल गई है। जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पूर्व बर्धमान जिलों में भी सड़कें और छोटी राष्ट्रीय राजमार्गें अवरुद्ध रही, और प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में सुधार की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाई। राष्ट्रीय राजमार्ग 12 के अवरुद्ध होने से बंगाल के उत्तर-दक्षिण मार्ग पर भारी यातायात जाम और लॉजिस्टिक देरी हुई। चुनाव की निकटता और बढ़ते तनाव ने प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा बलों की तैनाती को बढ़ा दिया है।

यह विवाद यह दिखाता है कि चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची संशोधन जैसी प्रशासनिक प्रक्रिया किस तरह राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का केंद्र बन सकती है। SIR प्रक्रिया के विरोध ने पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल को और जटिल बना दिया है, जिससे कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की बहस तेज हो गई है।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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