कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक भूमि ने एक बार फिर भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के पन्नों पर अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा लिया है। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव के पहले चरण में राज्य के मतदाताओं ने जिस उत्साह और संकल्प का परिचय दिया, उसने स्वतंत्रता के बाद के पिछले सात दशकों के सभी कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं। गुरुवार को राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान में जनता ने अभूतपूर्व भागीदारी दिखाते हुए 92.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया। यह आंकड़ा न केवल पश्चिम बंगाल के लिए बल्कि पूरे देश के चुनावी परिदृश्य के लिए एक विस्मयकारी मिसाल बनकर उभरा है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आधिकारिक तौर पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की पुष्टि करते हुए कहा कि यह पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में आजादी के बाद से अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है। इससे पहले राज्य में सर्वाधिक मतदान का रिकॉर्ड वर्ष 2011 के विधानसभा चुनावों में दर्ज किया गया था, जब 84.72 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। वर्ष 1951 में जहां यह आंकड़ा मात्र 43 प्रतिशत के आसपास था, वहीं 2026 के इस प्रथम चरण ने इसे 92 प्रतिशत के पार पहुंचाकर एक नया मानक स्थापित कर दिया है। निर्वाचन अधिकारियों का अनुमान है कि जब अंतिम डेटा संकलित होगा, तो यह प्रतिशत 95 के करीब भी पहुंच सकता है।

इस मतदान की सबसे गौरवशाली विशेषता महिलाओं की भागीदारी रही। आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि बंगाल की नारी शक्ति ने लोकतंत्र को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। पहले चरण में महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 92.69 रहा, जो पुरुष मतदाताओं के 90.92 प्रतिशत से काफी अधिक है। तृतीय लिंग के मतदाताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए 56.79 प्रतिशत मतदान किया। सुबह सात बजे से ही 16 जिलों के मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं, जहां भीषण गर्मी और सुरक्षा के कड़े पहरे के बावजूद लोग अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कुल 1,478 उम्मीदवार, जिनमें 167 महिलाएं शामिल हैं, इस चुनावी रण में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

इस भारी मतदान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों ही इस उच्च मतदान प्रतिशत को अपने-अपने पक्ष में एक स्पष्ट जनादेश मान रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नदिया जिले में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए इस भारी मतदान का स्वागत किया। उन्होंने इसे 'परिवर्तन की लहर' का प्रतीक बताया और दावा किया कि पिछले पांच दशकों की तुलना में इस बार चुनावी हिंसा सबसे न्यूनतम स्तर पर रही। प्रधानमंत्री के अनुसार, जनता का यह उत्साह राज्य की राजनीतिक दिशा बदलने के संकल्प को दर्शाता है।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्च मतदान प्रतिशत की व्याख्या अलग परिप्रेक्ष्य में की। उन्होंने तर्क दिया कि मतदान में यह भारी वृद्धि लोगों के भीतर व्याप्त उस डर का परिणाम हो सकती है कि यदि वे वोट नहीं देंगे, तो वे अपनी नागरिकता या मताधिकार खो सकते हैं। मुख्यमंत्री ने इस सक्रियता को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया से भी जोड़कर देखा। तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के हिंसा मुक्त चुनाव के दावों पर भी पलटवार किया, जिससे राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।

कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर, निर्वाचन आयोग ने इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता के विशेष इंतजाम किए थे। चुनाव के बाद की प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इनमें मतदान समाप्त होने के बाद सीसीटीवी फुटेज और वीडियो डेटा के प्रबंधन के लिए सख्त प्रोटोकॉल निर्धारित किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की धांधली की गुंजाइश न रहे। वर्ष 2021 के चुनाव आठ चरणों में हुए थे और कुल मतदान 82.30 प्रतिशत रहा था, लेकिन इस बार केवल पहले ही चरण ने उस सीमा को बहुत पीछे छोड़ दिया है।

152 सीटों का यह मुकाबला रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि 2021 में भाजपा ने इनमें से 59 और तृणमूल कांग्रेस ने 93 सीटें जीती थीं। अब सबकी निगाहें 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान और अंततः 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। पश्चिम बंगाल का यह रिकॉर्ड तोड़ मतदान इस बात का प्रमाण है कि विकास और अधिकारों के प्रति जनता की चेतना अब अपने चरमोत्कर्ष पर है, जो आने वाले समय में राज्य की नई नियति तय करेगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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