9 मार्च 2026 को भारतीय राजनीति, कूटनीति और साहित्य की दुनिया के एक प्रतिष्ठित नाम शशि थरूर अपना 70वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपनी प्रभावशाली वक्तृत्व कला, वैश्विक दृष्टि और बहुआयामी व्यक्तित्व के कारण थरूर न केवल भारतीय राजनीति में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी एक विशिष्ट पहचान रखते हैं। लेखक, राजनयिक, सार्वजनिक बुद्धिजीवी और राजनेता के रूप में उनका लंबा और समृद्ध सफर भारतीय सार्वजनिक जीवन की एक महत्वपूर्ण कहानी बन चुका है।

शशि थरूर का जन्म 9 मार्च 1956 को लंदन में हुआ था। उनके पिता मूल रूप से केरल से थे और अपने पेशे के कारण लंदन, बॉम्बे (अब मुंबई), कलकत्ता और दिल्ली जैसे शहरों में कार्यरत रहे। जब थरूर केवल दो वर्ष के थे, तब उनका परिवार भारत लौट आया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा तमिलनाडु के यरकौड स्थित मॉन्टफोर्ट स्कूल से शुरू हुई। बाद में उन्होंने मुंबई के कैम्पियन स्कूल और कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेजिएट स्कूल में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की।

उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से 1975 में स्नातक किया। इसके बाद वे अमेरिका के टफ्ट्स विश्वविद्यालय के फलेट्चर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी पहुंचे, जहां से उन्होंने 1978 में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उल्लेखनीय है कि मात्र 22 वर्ष की आयु में यह सम्मान पाने वाले वे उस समय के सबसे युवा छात्र थे।



संयुक्त राष्ट्र में लगभग तीन दशकों का करियर:

1978 में शशि थरूर ने संयुक्त राष्ट्र में अपने करियर की शुरुआत की और लगभग तीन दशक तक इस वैश्विक संस्था से जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम करते हुए संगठन में अपनी अलग पहचान बनाई।

  • 1996 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान के कार्यकारी सहायक तथा विशेष परियोजनाओं और संचार के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया।
  • जनवरी 2001 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र के जनसूचना विभाग का अंतरिम प्रमुख बनाया गया।
  • 1 जून 2002 से वे संचार और जनसूचना के लिए अंडर-सेक्रेटरी-जनरल के पद पर नियुक्त हुए।

इस भूमिका में वे संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक संचार रणनीति के प्रमुख जिम्मेदार बने। उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू हुईं। इनमें यहूदी-विरोध (एंटीसेमिटिज़्म) और इस्लामोफोबिया जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के पहले सेमिनार आयोजित करना शामिल था। इसके अलावा उन्होंने “टेन अंडर-रिपोर्टेड स्टोरीज़ द वर्ल्ड ऑट टू नो अबाउट” नामक वार्षिक सूची की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य दुनिया के उन महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना था जिन्हें वैश्विक मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती।


2006 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद की दौड़:

साल 2006 में भारत सरकार ने शशि थरूर को संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में नामित किया। उस समय यह उम्मीद जताई जा रही थी कि यदि वे चुने जाते हैं तो 50 वर्ष की आयु में वे इस पद पर पहुंचने वाले सबसे युवा नेताओं में से एक होते। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा आयोजित चारों स्ट्रॉ पोल में थरूर दूसरे स्थान पर रहे। अंततः दक्षिण कोरिया के बान की मून को महासचिव चुना गया। अंतिम चरण में थरूर को अमेरिका की ओर से वीटो का सामना करना पड़ा। मतदान के बाद उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और 2007 में संयुक्त राष्ट्र से औपचारिक रूप से विदा ले ली।


संयुक्त राष्ट्र से अलग होने के बाद शशि थरूर ने वैश्विक स्तर पर भारत और केरल से जुड़े मुद्दों पर व्याख्यान देने शुरू किए। उन्होंने दुबई स्थित अफ्रास वेंचर्स के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया और तिरुवनंतपुरम में अफ्रास एकेडमी फॉर बिजनेस कम्युनिकेशन की स्थापना में भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और विचार मंचों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। वे फलेट्चर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी के बोर्ड ऑफ ओवरसीयर्स, एस्पेन इंस्टीट्यूट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज और इंडो-अमेरिकन आर्ट्स काउंसिल, अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन तथा वर्ल्ड पॉलिसी जर्नल जैसे संगठनों के सलाहकार मंडलों से जुड़े रहे। 1976 में उन्होंने फलेट्चर स्कूल में “द फलेट्चर फोरम ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स” नामक अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर केंद्रित जर्नल की स्थापना भी की थी।



भारतीय राजनीति में नई पहचान:

2009 में शशि थरूर ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और केरल की तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। तब से वे लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। संसद में उनकी प्रभावशाली भाषण शैली, अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और समसामयिक मुद्दों पर स्पष्ट विचार उन्हें विशिष्ट बनाते हैं।


शशि थरूर केवल राजनेता या राजनयिक ही नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित लेखक भी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति, भारतीय इतिहास और समकालीन मुद्दों पर कई चर्चित पुस्तकें लिखी हैं। उनकी लेखनी और वक्तृत्व कला ने उन्हें वैश्विक स्तर पर एक सार्वजनिक बुद्धिजीवी के रूप में स्थापित किया है। 70 वर्ष की आयु में शशि थरूर का जीवन सफर भारतीय सार्वजनिक जीवन में वैश्विक अनुभव, बौद्धिक गहराई और राजनीतिक भागीदारी का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। संयुक्त राष्ट्र के गलियारों से लेकर भारतीय संसद तक की उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय दृष्टि और लोकतांत्रिक राजनीति किस तरह एक-दूसरे को समृद्ध कर सकती हैं।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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