देश के असल मुद्दे पीछे और राजनीतिक बहस आगे: इंटरव्यू में सांसद विवेक तन्खा ने दिए तीखे सवालों के बेबाक जवाब|
कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने एक साक्षात्कार में वंदे मातरम विवाद को अनावश्यक बताया और सोनम वांगचुक के आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट विचार रखे।

कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा, जिन्होंने एक विशेष साक्षात्कार के दौरान राष्ट्रीय मुद्दों और सोनम वांगचुक के आंदोलन पर बातचीत की।
कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने हाल ही में एक विशेष साक्षात्कार के दौरान देश के कई ज्वलंत, राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों पर खुलकर और स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी है। उन्होंने वंदे मातरम को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद को पूरी तरह से अनावश्यक बताया और कहा कि आज देश के सामने पेट्रोल, महंगाई, शिक्षा, रोजगार और छात्रों के मुद्दे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
वंदे मातरम विवाद पर क्या बोले विवेक तन्खा?
वंदे मातरम के पूरे स्वरूप के बजाय केवल कुछ चुनिंदा अंतरे गाने के निर्णय को लेकर पूछे गए सवाल पर विवेक तन्खा ने कहा कि इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी द्वारा जो विवाद खड़ा किया गया है, उसका कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद और अन्य वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं ने मिलकर यह ऐतिहासिक निर्णय लिया था कि इसके कुछ अंतरों को ही गाया जाएगा। वर्ष 1937 में रबींद्रनाथ टैगोर की सहमति से यह प्रस्ताव पारित किया गया था, ऐसे में इतने पुराने और स्वीकृत फैसले को दोबारा विवाद का विषय बनाना समझ से परे है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम देश की भावना और हर नागरिक के दिल की आवाज है, जिसका वे एक देशभक्त और जिम्मेदार नागरिक के रूप में पूर्ण सम्मान करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी आधिकारिक या सरकारी कार्यक्रम में निर्धारित एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) का पालन किया जाना कानूनन आवश्यक होता है, परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि निजी कार्यक्रमों पर कोई पाबंदी हो। कांग्रेस पार्टी अपने निजी आयोजनों में उसी परंपरा का पालन कर रही है जो देश के शुरुआती राष्ट्रीय नेताओं द्वारा तय की गई थी। उन्होंने इसे जनता का ध्यान असली और बुनियादी समस्याओं से भटकाने का एक राजनीतिक प्रयास करार दिया।
कॉलेजियम प्रणाली और न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व
राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति और वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व के उठे सवाल पर विवेक तन्खा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय देश का एक बेहद जिम्मेदार संस्थान है। वर्तमान कॉलेजियम व्यवस्था में उन्हें अभी किसी भी प्रकार के बड़े संस्थागत बदलाव की तत्काल आवश्यकता नहीं लगती है। यदि सरकार संसद में कोई नया अधिनियम लाकर इसका कोई विकल्प बनाना चाहती है, तो उसे पूरी तरह से संविधान की मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व में लाया गया एनजेएसी (NJAC) अधिनियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द कर दिया गया था, इसलिए यदि भविष्य में कोई नई व्यवस्था लाई जाती है जिसमें सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले, तो उसमें देश की न्यायिक योग्यता और मेरिट का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
जंतर-मंतर आंदोलन और सोनम वांगचुक का प्रकरण
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया आंदोलन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर पूछे गए सवाल पर सांसद तन्खा ने स्पष्ट किया कि आंदोलन की शुरुआत करने वालों ने ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे इस मंच को किसी भी प्रत्यक्ष राजनीतिक दल या नेता से नहीं जोड़ना चाहते हैं। यही कारण था कि कोई भी बड़ा राजनीतिक चेहरा वहां नहीं पहुंचा, हालांकि व्यक्तिगत रूप से वे स्वयं जंतर-मंतर गए थे और मंच पर पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी और पूरी पार्टी पहले दिन से ही देश के छात्रों, युवाओं और आम जनता की आवाज उठाते आए हैं।
सोनम वांगचुक के आमरण अनशन और उनकी गंभीर स्थिति के बारे में बात करते हुए विवेक तन्खा ने साझा किया कि उनका एकमात्र और मुख्य उद्देश्य सोनम वांगचुक की बहुमूल्य जान बचाना था। जब उनकी तबीयत अत्यधिक बिगड़ गई थी और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा था, तब उनकी किडनी फेल होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था और उनकी पत्नी गीतांजलि बेहद चिंतित थीं। पारिवारिक आग्रह और आपातकालीन स्थिति को देखते हुए उन्होंने अस्पताल बदलने में मदद की, सफदरजंग अस्पताल में आवश्यक प्रयास किए और दिल्ली उच्च न्यायालय में रविवार के दिन विशेष सुनवाई की व्यवस्था कराई। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार के किसी नुमाइंदे ने अनशन समाप्त करवाने के लिए उनसे संपर्क किया था, तो उन्होंने इसे खारिज करते हुए कहा कि उस वक्त उनकी प्राथमिकता केवल मानवीय आधार पर एक इंसान की जान बचाना था।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
