सुपरस्टार विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम ने द्रमुक और अन्नाद्रमुक के वर्चस्व को तोड़कर तमिलनाडु में सरकार बनाने की ओर कदम बढ़ाए हैं।

दक्षिण भारत की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात हो रहा है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के ताजा रुझानों और परिणामों ने राज्य के दशकों पुराने राजनीतिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है। सुपरस्टार विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) अपने पहले ही चुनावी रण में न केवल शानदार प्रदर्शन कर रही है, बल्कि राज्य में अगली सरकार बनाने की प्रबल दावेदार बनकर उभरी है। यह राजनीतिक परिदृश्य ठीक उसी तरह का अहसास करा रहा है, जैसा एक दशक पहले दिल्ली की सड़कों पर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) के उदय के दौरान देखा गया था। विजय की यह अप्रत्याशित सफलता तमिलनाडु में दशकों से चले आ रहे द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के द्विध्रुवीय प्रभुत्व को समाप्त करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय का उदय दिल्ली में केजरीवाल की सफलता के ब्लूप्रिंट से काफी मेल खाता है। जिस तरह 2010 के आसपास इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन से निकली 'आप' ने कांग्रेस और भाजपा जैसे दिग्गजों को हाशिए पर धकेल दिया था, ठीक वैसे ही विजय ने भ्रष्टाचार और वंशवादी राजनीति को अपना मुख्य हथियार बनाया है। टीवीके वर्तमान में 234 विधानसभा क्षेत्रों में से 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो इसके गठन के मात्र दो वर्षों के भीतर एक चमत्कारिक उपलब्धि है। केजरीवाल ने जहां एक 'आम आदमी' की छवि और आईआरएस अधिकारी के पद से त्यागपत्र देकर जनता का विश्वास जीता था, वहीं विजय ने अपने विशाल फिल्मी स्टारडम को एक गंभीर राजनीतिक विकल्प में तब्दील कर दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही नेताओं ने 'मुफ्त की रेबडियों' या जनकल्याणकारी योजनाओं को अपनी चुनावी रणनीति का मुख्य आधार बनाया है। दिल्ली में केजरीवाल का शासन मॉडल मुफ्त बिजली, पानी और शिक्षा पर टिका रहा, तो विजय ने भी तमिलनाडु की जनता से लुभावने वादे किए हैं। विजय की घोषणाओं में महिलाओं को प्रति माह 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता, प्रत्येक परिवार को छह मुफ्त गैस सिलेंडर और बेरोजगार स्नातकों के लिए 4,000 रुपये का भत्ता शामिल है। इन वादों ने गरीब और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को सीधे तौर पर प्रभावित किया है, जो पारंपरिक दलों की कार्यप्रणाली से नाराज थे।

विजय और केजरीवाल की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण समानता 'विकल्प' की तलाश है। दोनों ने जनता की उस नाराजगी को भुनाया है जो पुराने राजनीतिक चेहरों और भ्रष्टाचार के खिलाफ पनप रही थी। विजय ने अपने अभिनय करियर से संन्यास लेकर खुद को पूरी तरह राजनीति में झोंक दिया, जिसने मतदाताओं को उनके प्रति गंभीरता का संदेश दिया। हालांकि भौगोलिक परिस्थितियां और सांस्कृतिक संदर्भ अलग हैं, लेकिन सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) और बदलाव की चाहत दोनों ही मामलों में सामान्य कारक रहे हैं। तमिलनाडु की यह जीत दक्षिण भारत की राजनीति में न केवल टीवीके को स्थापित करेगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि वैचारिक स्पष्टता और जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ कोई भी नया दल पारंपरिक किलों को ध्वस्त कर सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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