उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी और पोस्टर वॉर ने नया मोड़ ले लिया है। लखनऊ में अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती की तस्वीर के साथ लगाए गए 'दोगलों से सावधान' संदेश वाले होर्डिंग चर्चा का केंद्र बन गए हैं। पोस्टर में लाल टोपी को निशाना बनाया गया है, जिसे समाजवादी पार्टी की पहचान माना जाता है। ऐसे में इस संदेश को सपा और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सियासी हमला माना जा रहा है।

लाल टोपी के चित्र के साथ बड़े अक्षरों में 'दोगलों से सावधान' लिखे इन होर्डिंग पर मायावती की तस्वीर और बसपा का बैनर भी दिखाई दे रहा है। पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि, इन होर्डिंग को किसने लगवाया है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इन्हें मायावती की ओर से जारी आधिकारिक पोस्टर या बयान मानना उचित नहीं होगा।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पोस्टर के जरिए संदेश देने की होड़ तेज होती जा रही है। लखनऊ में पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग राजनीतिक संदेशों वाले होर्डिंग लगाए जा रहे हैं। सबसे पहले समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर '27 में कृष्ण आएंगे' संदेश वाले पोस्टर सामने आए। इसके जवाब में भाजपा मुख्यालय के बाहर 'जो राम को लाए थे, वो 27 में कृष्ण को लाएंगे' लिखा पोस्टर लगाया गया। अब मायावती की तस्वीर के साथ 'दोगलों से सावधान' का संदेश सामने आने के बाद पोस्टर वॉर में बसपा की मौजूदगी भी चर्चा में आ गई है।

इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच गुरुवार, 5 नवंबर को बसपा प्रमुख मायावती ने लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में संगठन के पदाधिकारियों की अहम बैठक बुलाई। इसमें प्रदेश, मंडल और जिला स्तर के पदाधिकारियों के साथ सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्ष शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों की समीक्षा करना और पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाना रहा।

मायावती ने बैठक में पदाधिकारियों से पहले दिए गए निर्देशों पर हुई प्रगति की रिपोर्ट ली। इसके साथ ही विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के चयन और सर्वसमाज के बीच पार्टी का जनाधार बढ़ाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। बैठक में चुनावी तैयारियों, बूथ स्तर पर संगठन की स्थिति और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने के उपायों की समीक्षा की गई।

इस दौरान मायावती ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को संगठन मजबूत करने के साथ जनता के बीच सक्रिय रहने का निर्देश दिया। उन्होंने 'वोट हमारा, राज भी हमारा' का संदेश जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया। साथ ही भाजपा और कांग्रेस की नीतियों पर निशाना साधते हुए दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दे उठाए।

वहीं, बसपा ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर 6 दिसंबर 2026 को लखनऊ में विशाल श्रद्धा-सुमन समारोह आयोजित करने की तैयारी भी तेज कर दी है। यह कार्यक्रम आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर आयोजित होगा। पार्टी इस आयोजन को बड़े स्तर पर करने में जुटी है। विधानसभा चुनाव से पहले इसे संगठनात्मक जुटान और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन भाजपा, सपा और बसपा ने अपनी-अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। बसपा जहां संगठन को मजबूत करने और अपने मुद्दों को जनता तक पहुंचाने में जुटी है, वहीं लखनऊ में लाल टोपी के साथ लगाए गए 'दोगलों से सावधान' संदेश वाले होर्डिंग ने सपा और बसपा के बीच सियासी संदेशबाजी को नई चर्चा दे दी है। आने वाले समय में बसपा की चुनावी रणनीति और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर उसका राजनीतिक रुख महत्वपूर्ण रहेगा।

Pratahkal Bureau

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