उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में वापसी की है। पिछले नौ वर्षों के शासनकाल में यह पहला अवसर है जब सत्ताधारी दल किसी मुद्दे को लेकर सरकार और संगठन के स्तर पर इस तरह सड़कों पर उतरा है। केंद्र बिंदु में है 'नारी शक्ति वंदन विधेयक', जिसे लोकसभा में पारित न होने देने के लिए भाजपा सीधे तौर पर विपक्ष को जिम्मेदार ठहरा रही है। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निकली जन आक्रोश यात्रा के बाद अब इस अभियान का अगला पड़ाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी बनने जा रहा है। भाजपा का यह कदम केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने कैडर को सक्रिय करने और 'साइलेंट' महिला वोट बैंक पर अपनी पकड़ को और अधिक पुख्ता करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

इस सियासी घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष के रुख ने भाजपा को एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे दिया। अब तक सपा, बसपा और कांग्रेस भाजपा पर आरक्षण विरोधी होने का आरोप लगाते रहे थे, लेकिन अब भाजपा ने इसी हथियार को पलटते हुए विपक्ष को महिला अधिकारों का विरोधी घोषित कर दिया है। लखनऊ की सड़कों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उतरना पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश था कि अब 'सेफ जोन' से बाहर निकलकर जमीन पर उतरने का समय आ गया है। इस रणनीति के माध्यम से भाजपा न केवल विपक्षी एकता में दरार डालने की कोशिश कर रही है, बल्कि जनता के बीच यह संदेश भी दे रही है कि विपक्ष महिलाओं को उनका हक देने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।

वाराणसी में आगामी 28 अप्रैल को होने वाला महिला सम्मेलन इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस सम्मेलन में भाग लेकर पूर्वांचल की आधी आबादी को संबोधित करेंगे। पीएम के इस दौरे से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं वाराणसी पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया है, जो इस आयोजन की गंभीरता को दर्शाता है। भाजपा ने इसके लिए विशेष रूप से मंगलवार का दिन चुना है, जिसे 'सियासी मंगल' के तौर पर देखा जा रहा है। 21 अप्रैल को लखनऊ और ठीक एक सप्ताह बाद 28 अप्रैल को वाराणसी में शक्ति प्रदर्शन कर भाजपा यह सुनिश्चित करना चाहती है कि महिला आरक्षण का मुद्दा ठंडा न पड़े।

संगठनात्मक स्तर पर देखें तो लोकसभा चुनावों में कार्यकर्ताओं की कथित उदासीनता ने भाजपा के प्रदर्शन को प्रभावित किया था। अब संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के नेतृत्व में महिला इकाइयों को फुल एक्टिव मोड में लाया जा रहा है। सरकार और संगठन के बीच के समन्वय को बेहतर बनाने और कोर वोटरों को साथ जोड़े रखने के लिए इस मुद्दे को मास्टर स्ट्रोक की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। वाराणसी के सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री के अन्य विकास कार्यक्रमों, जैसे गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन में भी महिलाओं के मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी। इस प्रकार, भाजपा महिला सशक्तिकरण के नाम पर एक ऐसा नैरेटिव सेट कर रही है, जिसके सामने विपक्ष के लिए अपनी स्थिति स्पष्ट करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। 2027 की चुनावी नैया को पार लगाने के लिए भाजपा का यह 'नारी शक्ति' कार्ड प्रदेश की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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