क्या भविष्य की राजनीति के लिए रची जा रही है साजिश? उद्धव ठाकरे ने अमित शाह को घेरा
हिंगोली दौरे पर उद्धव ठाकरे ने कहा, देवेंद्र फडणवीस के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अमित शाह ने शुरू किया है 'ऑपरेशन देवेंद्र'।

हिंगोली में उद्धव ठाकरे (मध्य) ने अमित शाह (बाएं) और देवेंद्र फडणवीस (दाएं) पर राजनीतिक आरोप लगाए।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के हिंगोली दौरे के दौरान राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए 'ऑपरेशन देवेंद्र' का जिक्र किया और इसे भविष्य की राजनीति से जोड़कर कई सवाल खड़े किए। उद्धव ठाकरे ने कहा कि पार्टी के जो सांसद पाला बदलकर गए हैं, उन्होंने भाजपा में शामिल होने के बजाय एकनाथ शिंदे की पार्टी का दामन क्यों थामा। उन्होंने इस घटनाक्रम पर संदेह जताते हुए इसे एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया।
ठाकरे ने अपने संबोधन में दावा किया कि यह 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं, बल्कि 'ऑपरेशन देवेंद्र' है। उन्होंने तर्क दिया कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक कद को सीमित करने के लिए यह एक प्रयास है, ताकि भविष्य में वे प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर रहें या महाराष्ट्र की राजनीति में ही उलझे रहें। उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि यह उनका अपना आकलन है कि केंद्रीय नेतृत्व ने शिवसेना के सांसदों को तोड़कर एकनाथ शिंदे की पार्टी में भेजा है ताकि समय आने पर उनका इस्तेमाल एक 'गुलाम' के तौर पर किया जा सके और अमित शाह के पक्ष में मतदान करवाया जा सके।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने आगे कहा कि मौजूदा राजनीतिक उठापटक का मुख्य उद्देश्य दो-तिहाई बहुमत हासिल करना है। उन्होंने आशंका जताई कि भाजपा का अगला कदम संविधान में बदलाव करने का हो सकता है ताकि उन्हें बिना किसी बाधा के पूर्ण नियंत्रण मिल सके। ठाकरे ने परिसीमन बिल का जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि यदि इसे लागू किया जाता है, तो राज्यों की राजनीतिक अहमियत कम हो जाएगी और देश की पूरी शक्ति का केंद्र उत्तर भारत की ओर झुक जाएगा, जिससे अन्य राज्यों के वोटों का महत्व नगण्य हो जाएगा।
हिंगोली में दिए गए इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। उद्धव ठाकरे ने यह साफ किया कि वे राजनीतिक घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रख रहे हैं और समय-समय पर इसके निहितार्थ जनता के सामने रखेंगे। उन्होंने जिस प्रकार से सांसद दल-बदल और आगामी चुनावी रणनीति को एक साथ जोड़कर देखा है, उससे साफ है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में टकराव और बढ़ सकता है। उनके द्वारा उठाए गए सवाल न केवल विपक्षी दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे राज्य की भविष्य की दिशा को लेकर भी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

Lalita Rajput
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