यवतमाल से उद्धव ठाकरे का BJP पर तीखा वार ; 'BJP-मुक्त राम' की मांग से केंद्र को दी खुली चुनौती?
उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के यवतमाल में भाजपा पर बड़ा हमला बोलते हुए 'BJP-मुक्त राम' का नारा दिया। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर में कथित दान घोटाले, वित्तीय अनियमितताओं और हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप लगाया। साथ ही भाजपा के हिंदुत्व, विपक्षी दलों को तोड़ने की राजनीति और राम के राजनीतिक इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए।

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के यवतमाल में आयोजित एक जनसभा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए 'BJP-मुक्त राम' का नारा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने भगवान राम और राम मंदिर को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया है तथा हिंदुओं की आस्था और भावनाओं के साथ विश्वासघात किया है। अपने संबोधन में ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि भगवान राम किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं और प्रत्येक हिंदू की आस्था के केंद्र हैं।
यवतमाल-वाशिम लोकसभा क्षेत्र में आयोजित इस रैली के दौरान उद्धव ठाकरे ने भाजपा के हिंदुत्व के स्वरूप पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक हिंदुत्व मानवता का संदेश देता है, जबकि भाजपा का हिंदुत्व मंदिरों की लूट और राजनीतिक स्वार्थ तक सीमित हो गया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ऐसे हिंदुत्व को स्वीकार नहीं करती और शिवसेना (यूबीटी) 'BJP-मुक्त राम' के लिए आंदोलन और विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेगी।
अपने भाषण में ठाकरे ने कहा कि भाजपा ने भगवान राम को एक राजनीतिक प्रतीक बना दिया है, जबकि उन्हें करोड़ों लोगों द्वारा पूजनीय देवता के रूप में सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम को किसी भी राजनीतिक दल के साथ जोड़ना या उन पर किसी दल का एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश उचित नहीं है। उनके अनुसार, राम हर श्रद्धालु और हर हिंदू के हैं, केवल भाजपा के नहीं। ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता में आने के लिए भगवान राम के नाम का इस्तेमाल किया और बाद में हिंदुओं की भावनाओं के साथ विश्वासघात किया।
We want 'BJP-mukt Ram'
— Being Political (@BeingPolitical1) June 27, 2026
~ Uddhav Thackeraypic.twitter.com/AwLjvgpYWU
रैली के दौरान उद्धव ठाकरे ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान को लेकर सामने आए कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और विश्वास के साथ मंदिर में धन और बहुमूल्य वस्तुएं दान की थीं, लेकिन अब इन दान सामग्रियों में कथित अनियमितताओं और सामान के गायब होने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। ठाकरे ने कहा कि यदि ये आरोप सही हैं तो यह हिंदुओं की भावनाओं के साथ गंभीर विश्वासघात है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल धार्मिक नारे लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि मंदिर में प्राप्त दान और संपत्ति के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर विपक्षी दलों को तोड़ने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने के लिए भाजपा लगातार राजनीतिक दलों में टूट-फूट करवा रही है। उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने और विपक्ष को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब शिवसेना (यूबीटी) हाल ही में बड़े राजनीतिक झटके का सामना कर चुकी है। पार्टी के छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे राज्यभर में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच पहुंचकर जनसभाएं कर रहे हैं तथा पार्टी को दोबारा मजबूत करने के प्रयास में जुटे हैं। इन सभाओं के दौरान वह लगातार भाजपा पर विपक्षी दलों को कमजोर करने और देश में एक-दलीय राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करने का आरोप लगा रहे हैं।
उद्धव ठाकरे के 'BJP-मुक्त राम' वाले बयान पर भाजपा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि भगवान राम पर किसी राजनीतिक दल का कब्जा होने का सवाल ही नहीं उठता। पार्टी का कहना है कि वर्षों पुराने वादे को पूरा करते हुए राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना भाजपा की बड़ी उपलब्धि रही है। साथ ही भाजपा नेताओं ने राम मंदिर के दान के दुरुपयोग या कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को भी अस्वीकार करते हुए सरकार और मंदिर प्रबंधन के कामकाज का बचाव किया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 'BJP-मुक्त राम' का नारा भाजपा के पुराने 'कांग्रेस-मुक्त भारत' जैसे राजनीतिक नारों की तर्ज पर दिया गया एक जवाब माना जा रहा है। हालांकि उद्धव ठाकरे का कहना है कि उनका उद्देश्य भगवान राम को राजनीतिक विवादों से दूर रखना और यह संदेश देना है कि धार्मिक आस्था किसी भी राजनीतिक दल की जागीर नहीं हो सकती। ऐसे में उनका यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ने के साथ आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक रणनीतियों और चुनावी विमर्श का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
