पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा देखे गए वो 5 पल जिन्होंने बटोरी सुर्खियां।

भारत के लोकतांत्रिक उत्सव में अब केवल रैलियों और जनसभाओं का महत्व नहीं रह गया है, बल्कि सोशल मीडिया एक ऐसे समानांतर मंच के रूप में उभरा है जहाँ नेताओं की हर गतिविधि जनता की पैनी नजर में रहती है। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के हालिया विधानसभा चुनावों में जहाँ एक ओर मतों की गणना और राजनीतिक समीकरणों पर मंथन चल रहा है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल स्पेस में उन दृश्यों की चर्चा सबसे अधिक है जिन्होंने प्रचार के दौरान करोड़ों व्यूज बटोरे। ये वीडियो केवल मनोरंजन का साधन नहीं बने, बल्कि इन्होंने नेताओं की छवि और चुनावी नैरेटिव को गढ़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हमेशा से आक्रामक रुख रखने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक वीडियो मतदान के अंतिम चरणों के बाद तेजी से प्रसारित हुआ। इस वीडियो में टीएमसी सुप्रीमो का सख्त और चेतावनी भरा अंदाज देखने को मिला। उन्होंने चुनाव आयोग और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा प्रहार करते हुए स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं। विशेष रूप से ईवीएम की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता और 'मरते दम तक लड़ने' का संकल्प उनके समर्थकों के बीच चर्चा का केंद्र बना रहा। यह वीडियो तृणमूल कांग्रेस के जमीनी संघर्ष और प्रतिरोध की भावना को प्रदर्शित करने वाला एक डिजिटल दस्तावेज बन गया।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक सहज और मानवीय पहलू पश्चिम बंगाल के झारग्राम में कैमरे में कैद हुआ। सुरक्षा के कड़े प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए प्रधानमंत्री ने अपना काफिला एक स्थानीय विक्रेता के पास रुकवाया और 'झालमुड़ी' खाने की इच्छा जताई। उनके द्वारा कहे गए शब्द "भाई, हमें अपना झालमुड़ी खिलाओ" सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गए। भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री के आम जनमानस के प्रति जुड़ाव के रूप में प्रचारित किया, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे जनसंपर्क की एक कुशल कला के रूप में देखा गया।

दक्षिण भारत के चुनावी मैदान में भी हलचल कम नहीं रही। तमिलनाडु के कन्याकुमारी से अभिनेता और टीवीके प्रमुख विजय का एक संक्षिप्त वीडियो सामने आया, जिसने इंटरनेट यूजर्स को हैरान कर दिया। साइकिल पर सवार होकर प्रचार कर रहे सुपरस्टार की ओर जब किसी प्रशंसक ने फूलों की गेंद उछाली, तो अनपेक्षित प्रतिक्रिया में विजय साइकिल छोड़कर अपनी सुरक्षा टीम की ओर दौड़ पड़े। यह चंद सेकंड की क्लिप सुरक्षा चिंताओं और सार्वजनिक जीवन की चुनौतियों को बयां करती नजर आई। इसके अतिरिक्त, असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ऊर्जा ने सबका ध्यान खींचा। कछार जिले में एक जनसभा के दौरान जनता तक तेजी से पहुंचने के लिए उनका मैदान में दौड़ना उनकी सक्रिय कार्यशैली का प्रतीक बनकर उभरा।

प्रशासनिक स्तर पर भी एक वीडियो ने खूब सुर्खियां बटोरीं। उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा, जो पश्चिम बंगाल में चुनाव ड्यूटी पर तैनात थे, का एक सख्त संदेश वायरल हुआ। उन्होंने टीएमसी समर्थकों और उम्मीदवार को चेतावनी देते हुए निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की बात कही। इस 'सिंघम' अवतार की जहाँ जनता ने सराहना की, वहीं राजनीतिक दलों के बीच इस पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। इन पांचों वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युग में चुनाव केवल घोषणापत्रों से नहीं, बल्कि डिजिटल स्क्रीन पर दिखने वाले इन अनफिल्टर्ड पलों से भी प्रभावित होते हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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