75 रुपये नकद वाली गुमनाम NCPI पार्टी बनी TMC के 20 बागी सांसदों का सहारा, NDA में शामिल होने की तैयारी।

भारतीय राजनीति के फलक पर एक ऐसी घटना घटी है जिसने सत्ता के गलियारों को हिलाकर रख दिया है। एक ऐसी राजनीतिक पार्टी, जिसका वित्तीय वर्ष का अंत कभी मात्र 75 रुपये की नकद राशि के साथ हुआ था, आज राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बनी हुई है। नेशनललिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI), जिसे अब तक राजनीतिक परिदृश्य में एक अत्यंत छोटी और कम जानी-पहचानी इकाई माना जाता था, अब भारतीय राजनीति की एक बड़ी ताकत बनने की दहलीज पर खड़ी है। यह अप्रत्याशित बदलाव तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों के उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने NCPI में शामिल होने और भाजपा के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को अपना समर्थन देने का संकल्प लिया है।

इस राजनीतिक उठापटक की शुरुआत तब हुई जब TMC के असंतुष्ट सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और सदन में अपने लिए बैठने की अलग व्यवस्था की मांग की। बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में इन सांसदों ने स्पीकर को सौंपे गए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसमें दावा किया गया कि TMC के दो-तिहाई सांसद अब इस नई राजनीतिक यात्रा का हिस्सा बनने को तैयार हैं। यदि लोकसभा स्पीकर द्वारा इस विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी जाती है, तो NCPI, जिसके पास अभी तक न तो कोई निर्वाचित प्रतिनिधि था और न ही कोई मजबूत चुनावी आधार, अचानक लोकसभा की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। यह घटनाक्रम न केवल TMC के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि NDA की ताकत को भी संसद के भीतर काफी बढ़ा देगा।

NCPI की उत्पत्ति और इसकी अब तक की यात्रा बेहद साधारण रही है। जनवरी 2023 में भारत के चुनाव आयोग (ECI) के साथ पंजीकृत इस पार्टी का पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराइल की एक इमारत में स्थित है। इसके वित्तीय रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2022-23 के दौरान पार्टी को शुभचिंतकों से कुल 1,13,075 रुपये का चंदा प्राप्त हुआ था, जिसमें से अधिकांश राशि त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में खर्च हो गई थी। उस चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद सीमित रहा और उनके उम्मीदवारों को नाममात्र के वोट मिले थे। पार्टी का नेतृत्व करने वाले शेवली कुंडू और उत्तीय कुंडू का पृष्ठभूमि भी काफी अलग रही है, जिसमें वकालत से लेकर मोटिवेशनल स्पीकिंग और योग प्रशिक्षण तक शामिल हैं।

इस प्रस्तावित विलय के साथ ही पार्टी के भीतर आंतरिक कलह के संकेत भी मिलने लगे हैं। जहां राष्ट्रीय संगठन महासचिव होने का दावा करने वाले शांतनु डे ने इस विस्तार का स्वागत किया है, वहीं पार्टी की संस्थापक शेवली कुंडू ने उनके आधिकारिक पदों को चुनौती दी है। NCPI का वर्तमान स्वरूप एक 'रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज़्ड पॉलिटिकल पार्टी' का है, जिसका अर्थ है कि इसे अभी तक राज्य या राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है।

यह पूरी घटना न केवल दल-बदल की राजनीति का एक उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे भारतीय राजनीति में छोटी इकाइयां रातों-रात प्रमुख राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनकर अपनी पहचान बदल सकती हैं। स्पीकर का अंतिम निर्णय तय करेगा कि क्या यह नन्ही पार्टी वाकई लोकसभा की शक्तिशाली ताकतों में शुमार होगी या फिर यह बगावत कानूनी पेचीदगियों में उलझकर रह जाएगी। फिलहाल, सबकी निगाहें इस विलय की कानूनी वैधता और TMC की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story