क्या टूट जाएगी तृणमूल कांग्रेस? ऋतब्रता बनर्जी के '59 वाले दांव' से बंगाल की राजनीति में हड़कंप
तृणमूल कांग्रेस से हाल ही में निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा पहुंचकर 59 विधायकों के साथ नया नेता प्रतिपक्ष चुनने के लिए बैठक बुलाई है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (बाएं) और बागी टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी (दाएं) कोलकाता में राजनीतिक गतिरोध के दौरान पार्टी में मचे आंतरिक असंतोष के संदर्भ में।
West Bengal TMC Rebellion 2026 : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐसा भूचाल आ गया है जिसने सत्ता के गलियारों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। विधानसभा चुनाव के बाद खुद को संभालने की कोशिश कर रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक ऐसी बगावत पनप चुकी है, जो पार्टी को विभाजन की कगार पर ले आई है। टीएमसी से हाल ही में निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने बंगाल विधानसभा में पार्टी के 59 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व को सीधी चुनौती दे दी है। बागी गुट द्वारा ऋतब्रत को विधानसभा में नए नेता प्रतिपक्ष के तौर पर पेश करने की रणनीति बनाई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह दावा हकीकत में बदलता है, तो यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा और करारी हार के बाद दूसरा सबसे घातक झटका साबित हो सकता है।
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी अचानक भारी सुरक्षा और टीएमसी के 59 विधायकों के कथित समर्थन पत्र के साथ राज्य विधानसभा पहुंच गए हैं। इस दावे को तब और मजबूती मिली जब टीएमसी के कई अन्य प्रमुख विधायक भी एक-एक करके विधानसभा परिसर में दाखिल होने लगे। विधानसभा पहुंचने वाले नेताओं में अरुप रॉय, शिउली साहा और अकरुजमां जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं। इसके अलावा सबीना यास्मिन ने भी विधानसभा पहुंचकर इस बात की पुष्टि कर दी है कि बागी गुट आज ही नए नेता प्रतिपक्ष को चुनने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने जा रहा है। विधायकों की यह क्रमिक मौजूदगी दर्शाती है कि दीदी के खिलाफ यह चक्रव्यूह बेहद सुनियोजित तरीके से रचा गया है।
ऋतब्रत बनर्जी का यह दांव यदि पूरी तरह सही साबित होता है, तो बंगाल की राजनीति में ठीक वैसा ही परिदृश्य देखने को मिल सकता है जैसा हाल के वर्षों में महाराष्ट्र में शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अजीत पवार गुट के मामलों में देखा गया था। इसके बाद असली तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधित्व, पार्टी के नाम और उसके आधिकारिक चुनाव चिन्ह पर कब्जे को लेकर एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई छिड़ना तय है। संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर नजर डालें तो यदि ऋतब्रत द्वारा समर्थित विधायकों की यह संख्या आधिकारिक रूप से पुख्ता हो जाती है, तो यह संख्या दल-बदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) के तहत अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को पार कर जाएगी, जिससे बागी विधायकों की सदस्यता को कोई खतरा नहीं रहेगा और वे कानूनी रूप से पार्टी में विभाजन की प्रक्रिया को अमलीजामा पहना सकेंगे।
इस पूरी बगावत के सूत्रधार ऋतब्रत बंदोपाध्याय का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प और विविध विचारधाराओं से भरा रहा है। पूर्व वामपंथी नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के बेहद करीबी माने जाने वाले ऋतब्रत को साल 2014 में सीपीआई (एम) ने राज्यसभा सदस्य के रूप में नामांकित किया था। हालांकि, साल 2017 में पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने तीन साल तक निर्दलीय सांसद के रूप में कार्य किया। इसके बाद आर.जी. कर अस्पताल विवाद के दौरान जब जवाहर सरकार ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया, तो ऋतब्रत ने टीएमसी के टिकट पर संसद में वापसी की। बाद में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी उन्हें राज्य की सक्रिय राजनीति में लेकर आए और विधानसभा का उम्मीदवार बनाया, लेकिन आज उसी ऋतब्रत ने ममता बनर्जी के खिलाफ सबसे बड़ा दांव खेल दिया है।
इस गहरे असंतोष की पटकथा तब लिखी गई जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा के भीतर कथित 'सिग्नेचर स्कैंडल' का मुद्दा उठाया, जिससे नाराज होकर ममता बनर्जी ने दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। राजनीतिक हलकों में इसे आवाज दबाने की कोशिश के रूप में देखा गया, जिसके बाद अंदरूनी सुगबुगाहट तेज हो गई। इस बगावत की पहली स्पष्ट झलक तब मिली जब रविवार को कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई गई टीएमसी विधायक दल की बैठक में लगभग 80 विधायकों में से महज 20 विधायक ही पहुंचे। इतनी बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति ने पहले ही नेतृत्व की नींद उड़ा दी थी और अब ऋतब्रत ने उन्हीं अनुपस्थित विधायकों को एकजुट कर ममता बनर्जी के खिलाफ 'खेला' कर दिया है, जिससे बंगाल में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
