टीएमसी के भीतर आंतरिक नेतृत्व विवाद ने वित्तीय संकट का रूप ले लिया है, जब वरिष्ठ नेता अरोप बिस्वास ने पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग की। 1000 करोड़ रुपये से अधिक के फंड और संपत्तियों के नियंत्रण को लेकर गहराते मतभेद ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है, जबकि पार्टी ने इसे अस्वीकार किया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी आंतरिक टकराव अब एक गंभीर वित्तीय विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अरोप बिस्वास द्वारा कथित रूप से एचडीएफसी बैंक को पत्र लिखकर टीएमसी के सभी बैंक खातों को तत्काल फ्रीज करने की मांग किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। यह कदम पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठनात्मक नियंत्रण और वित्तीय अधिकार को लेकर बढ़ते संघर्ष की ओर इशारा करता है।

सूत्रों के अनुसार, अरोप बिस्वास ने अपने पत्र में दावा किया है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और वित्तीय नियंत्रण को लेकर गंभीर विवाद उत्पन्न हो चुका है, जिसके कारण बैंक खातों में किसी भी प्रकार के अनधिकृत लेनदेन की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने आग्रह किया है कि जब तक इस विवाद का समाधान नहीं हो जाता, तब तक सभी डेबिट लेनदेन को स्थगित रखा जाए।

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद टीएमसी के लगभग 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फंड और संपत्तियों के नियंत्रण को लेकर सामने आया है। बिस्वास, जो खुद को पार्टी का कोषाध्यक्ष बताने वाले खेमे के साथ जुड़े बताए जा रहे हैं, ने बैंक से अनुरोध किया है कि ऐसे समय में किसी भी प्रकार के “अनधिकृत” वित्तीय लेनदेन की अनुमति न दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जब पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संपत्तियों के नियंत्रण को लेकर दो पक्षों में स्पष्ट मतभेद हैं, तो बैंक खातों की सुरक्षा आवश्यक हो जाती है।

पत्र में बिस्वास ने यह भी आशंका जताई है कि उनके हस्ताक्षर से जारी किए गए चेक का दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने कहा कि संगठन में नियंत्रण को लेकर स्पष्टता न होने के कारण वित्तीय अधिकारों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। उनका तर्क है कि जब तक नेतृत्व और अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक खातों को यथास्थिति में रखा जाना चाहिए।

टीएमसी सूत्रों ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति, जिसकी अध्यक्षता ममता बनर्जी करती हैं, ने 5 जून को वरिष्ठ नेता सुभाशिष चक्रवर्ती को पार्टी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था। पार्टी का कहना है कि इस स्थिति में अरोप बिस्वास के पास इस मामले में कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। पार्टी ने यह भी दावा किया है कि वह संसद और विधानसभा दोनों स्तरों पर इन बागी दावों को चुनौती दे चुकी है।

घटनाक्रम के अनुसार, बिस्वास का यह पत्र 12 जून को लिखा गया था, जिसे चार दिन बाद कोलकाता के सेंट्रल प्लाजा स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा में प्राप्त किया गया। यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब 10 जून को टीएमसी के लगभग 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर स्वयं को एक अन्य राजनीतिक संगठन में विलय करने की घोषणा की थी और पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न पर दावा पेश करने की बात कही थी।

पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे आंतरिक मतभेदों के बीच यह विवाद और गहरा होता दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, संगठनात्मक ढांचे में लगातार बदलाव और नेतृत्व को लेकर खींचतान के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। वहीं कुछ पक्षों का दावा है कि अरोप बिस्वास को पहले ही कोषाध्यक्ष पद से हटाया जा चुका था, हालांकि इस पर समय और निर्णय को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

बिस्वास ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि पार्टी के भीतर कई गुट स्वयं को टीएमसी का वैध प्रतिनिधि बताकर बैंक खातों पर नियंत्रण का दावा कर रहे हैं, जिससे कानूनी और प्रशासनिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस स्थिति में पार्टी के फंड का उपयोग अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा किया जा सकता है। इस पूरे विवाद का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि टीएमसी के संगठनात्मक फंड और संपत्तियों पर नियंत्रण सीधे तौर पर पार्टी की शक्ति संरचना से जुड़ा माना जाता है। राजनीतिक दलों के भीतर वित्तीय नियंत्रण अक्सर नेतृत्व और संगठनात्मक अधिकार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है।

पार्टी के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और आंतरिक असंतोष के बीच यह विवाद उस व्यापक संकट की ओर संकेत करता है जिसमें नेतृत्व, संगठन और संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर गंभीर मतभेद सामने आ रहे हैं। फिलहाल बैंक की ओर से इस मामले में किसी भी प्रकार की आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है। नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में खातों को फ्रीज करने के लिए आमतौर पर कानूनी आदेश या अधिकृत संगठनात्मक निर्णय की आवश्यकता होती है। इसलिए यह मामला अभी केवल एक औपचारिक अनुरोध के रूप में देखा जा रहा है, न कि किसी लागू कार्रवाई के रूप में।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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