मुंबई की राजनीति में एक बार फिर ठाकरे नाम ने हलचल तेज कर दी है। लगभग दो दशकों बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आना न केवल महाराष्ट्र की सियासत के लिए अहम है, बल्कि देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका—बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी)—के आगामी चुनावों को निर्णायक मोड़ देने वाला घटनाक्रम भी माना जा रहा है। वर्षों की राजनीतिक दूरी, वैचारिक मतभेद और अलग-अलग दलों के रास्ते तय करने के बाद अब दोनों चचेरे भाई एक साझा रणनीति के साथ मैदान में उतरने जा रहे हैं।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच घोषित यह राजनीतिक गठबंधन बीएमसी चुनावों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। यह चुनाव 15 जनवरी 2026 को प्रस्तावित है और इसे मुंबई की सत्ता का सेमीफाइनल भी कहा जाता है। बीएमसी का बजट, प्रशासनिक शक्ति और राजनीतिक प्रतीकात्मकता इसे राज्य की सबसे प्रभावशाली स्थानीय संस्था बनाते हैं। ऐसे में ठाकरे बंधुओं का साथ आना सीधे तौर पर सत्ता संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

इस गठबंधन को व्यापक रूप से मराठी मतदाताओं के एकीकरण की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। मुंबई में लंबे समय से मराठी अस्मिता, स्थानीय अधिकार और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दे चुनावी विमर्श का हिस्सा रहे हैं। ठाकरे परिवार की राजनीति की जड़ें इन्हीं मुद्दों से जुड़ी रही हैं। अब, दोनों दलों के साथ आने से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि मराठी हितों को एकजुट होकर आगे बढ़ाया जाएगा।

चुनावी माहौल में "मुंबईचा महापौर मराठी माणूस होणार आहे." - "मुंबई का मेयर मराठी ही होगा" जैसे नारों का जोर पकड़ना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि ये नारे और दावे पूरी तरह चुनावी अभियान का हिस्सा हैं। बीएमसी चुनावों के नतीजे अभी आने बाकी हैं और मेयर का चयन पार्षदों के बहुमत के आधार पर ही होगा। ऐसे में किसी भी पद को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय या पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी और महायुति गठबंधन ने इस नए राजनीतिक समीकरण पर प्रतिक्रिया दी है। भाजपा का कहना है कि वह भी पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में है और यदि उसे बहुमत मिलता है तो मेयर उसके ही निर्वाचित पार्षदों में से चुना जाएगा। पार्टी नेताओं ने यह संकेत दिया है कि ठाकरे बंधुओं का साथ आना चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगा या नहीं, यह फैसला मतदाता करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ठाकरे बंधुओं का पुनर्मिलन भावनात्मक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर असर डाल सकता है। जहां एक ओर यह मराठी मतदाताओं में उत्साह और nostalgia पैदा करता है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों के लिए नई चुनौती भी खड़ी करता है। बीएमसी चुनाव अब केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह मुंबई की राजनीतिक दिशा तय करने वाला मुकाबला बनता जा रहा है।

आखिरकार, यह गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि 20 साल बाद एक हुए ठाकरे बंधु मुंबई की सत्ता की कहानी को किस दिशा में मोड़ते हैं, लेकिन इतना तय है कि बीएमसी चुनाव अब पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प और निर्णायक होने वाले हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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