अमित शाह से मुलाकात के बाद परिसीमन पर बदला विजय का रुख, दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी बचाने की रखी शर्त|
अमित शाह से मुलाकात के बाद थलपति विजय ने परिसीमन पर रुख बदलते हुए लोकसभा में राज्यों की मौजूदा हिस्सेदारी सुरक्षित रखने की कानूनी मांग की है।

चेन्नई में आयोजित 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय|
चेन्नई- लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में एक नया मोड़ सामने आया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने परिसीमन के मुद्दे पर अपने पहले के रुख से कुछ नरमी दिखाते हुए केंद्र सरकार से दक्षिणी राज्यों के मौजूदा संसदीय प्रतिनिधित्व की हिस्सेदारी सुरक्षित रखने की मांग की है। यह मांग उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में महाबलीपुरम में हुई 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में रखी।
विजय का यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कुछ दिन पहले ही तमिलनाडु विधानसभा में उनकी सरकार ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों और राज्यों के बीच वर्तमान सीट वितरण को बनाए रखने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन 20 अगस्त को दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विजय ने अपने भाषण में 543 सीटों पर स्थायी रोक की मांग दोहराने के बजाय एक व्यापक सुरक्षा की मांग रखी। उन्होंने केंद्र से स्पष्ट कानूनी आश्वासन देने को कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहने वाले किसी भी राज्य के संसद में प्रतिनिधित्व का प्रतिशत परिसीमन के बाद कम नहीं होना चाहिए।
अमित शाह के सामने रखी परिसीमन की चिंता
विजय ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने पिछले दशकों में जनसंख्या नियंत्रण, मानव विकास और आर्थिक प्रगति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। ऐसे में केवल जनसंख्या के आधार पर संसदीय सीटों के पुनर्वितरण से इन राज्यों को राजनीतिक रूप से नुकसान नहीं होना चाहिए।
दक्षिणी राज्यों की मुख्य चिंता यह है कि यदि भविष्य में लोकसभा सीटों का आवंटन मौजूदा या नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है, तो अपेक्षाकृत अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की सीटें बढ़ सकती हैं। इसके मुकाबले जिन राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया है, उनकी लोकसभा में हिस्सेदारी घटने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण दक्षिणी राज्यों में परिसीमन को लेकर लंबे समय से राजनीतिक चिंता बनी हुई है।
विजय ने इस मुद्दे को केवल तमिलनाडु का विषय नहीं बताया, बल्कि इसे संघीय ढांचे और राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन से जोड़कर देखा। उनका कहना है कि विकास और जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को इसकी राजनीतिक कीमत नहीं चुकानी चाहिए।
क्या मोदी सरकार का साथ देंगे विजय?
विजय के बदले हुए रुख के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या TVK प्रमुख अब केंद्र के साथ परिसीमन के मुद्दे पर टकराव के बजाय बातचीत और कानूनी सुरक्षा के रास्ते को प्राथमिकता दे रहे हैं।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि विजय ने परिसीमन पर केंद्र सरकार के प्रस्ताव का समर्थन कर दिया है। उनकी मांग का मूल उद्देश्य दक्षिणी राज्यों की मौजूदा राजनीतिक हिस्सेदारी को सुरक्षित रखना है। उन्होंने केंद्र से ऐसी कानूनी व्यवस्था की मांग की है, जिससे परिसीमन के बाद भी राज्यों की संसद में हिस्सेदारी कम न हो। इसलिए इसे सीधे तौर पर मोदी सरकार के समर्थन के रूप में देखना सही नहीं होगा। बल्कि यह उनके रुख में रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
NEET से लेकर कावेरी जल विवाद तक कई मुद्दे उठाए
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विजय ने केवल परिसीमन का मुद्दा ही नहीं उठाया। उन्होंने तमिलनाडु को NEET से छूट देने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि राज्य को मेडिकल शिक्षा में अपने सामाजिक और शैक्षणिक मॉडल के अनुरूप प्रवेश व्यवस्था लागू करने की पर्याप्त स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सीटों को 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर भरने की अनुमति देने की मांग रखी।
इसके अलावा विजय ने अंतर-राज्यीय जल विवादों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कावेरी जल विवाद में सुप्रीम कोर्ट और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों को समय पर और पूरी तरह लागू करने पर जोर दिया। तमिलनाडु की ओर से मुल्लापेरियार बांध के जलस्तर को 152 फीट तक बढ़ाने के मामले में भी अदालत के आदेशों के पालन की मांग रखी गई।
वित्तीय बंटवारे में दक्षिणी राज्यों के प्रदर्शन को मिले महत्व
विजय ने वित्तीय संघवाद का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि भविष्य के वित्तीय बंटवारे में राज्यों की जरूरतों के साथ उनके प्रदर्शन को भी महत्व दिया जाए। उनका तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, आर्थिक विकास और सामाजिक सूचकांकों में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनके योगदान को वित्तीय व्यवस्था में उचित महत्व मिलना चाहिए।
उन्होंने दक्षिणी राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि साझा संसाधन तथा आर्थिक हित राज्यों के बीच विवाद का कारण बनने के बजाय सहयोग का आधार बन सकते हैं।
विरोधियों ने उठाए सवाल
विजय के बदले रुख पर विपक्षी और क्षेत्रीय राजनीतिक नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। AMMK नेता टी.टी.वी. दिनाकरन ने आरोप लगाया कि विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ कड़ा प्रस्ताव पारित करने के कुछ ही दिनों बाद मुख्यमंत्री का केंद्र से अलग तरह की मांग करना उनकी नीति में बदलाव को दिखाता है। उन्होंने सरकार से परिसीमन पर अपनी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
वहीं, दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जताई और 543 लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या को लंबे समय तक बनाए रखने की मांग सामने रखी। इससे साफ है कि परिसीमन का मुद्दा केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिणी राज्यों के बीच साझा राजनीतिक चिंता का विषय बन चुका है।
कुल मिलाकर, अमित शाह की मौजूदगी में विजय का परिसीमन पर नया रुख राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने पहले जहां मौजूदा सीटों और उनके वितरण को स्थायी रूप से बनाए रखने की मांग की थी, वहीं अब उनका जोर इस बात पर है कि किसी भी परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों की संसद में राजनीतिक हिस्सेदारी कम न हो। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और विजय की TVK इस मुद्दे पर आगे कौन-सी रणनीति अपनाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
