डीएमके-एआईएडीएमके के गढ़ में बड़ी सेंध: क्या विजय की नई यूनियन बदल देगी तमिलनाडु की रफ़्तार?
टीएनएसटीसी के चालक और परिचालकों ने डीएमके-एआईएडीएमके यूनियनों को छोड़ टीवीके के बैनर तले एकजुट होने का किया फैसला, जल्द होगा संगठन का एलान।

टीवीके प्रमुख थलपति विजय प्रशंसकों का अभिवादन करते हुए; परिवहन कर्मचारी अब उनके समर्थन में नई यूनियन बना रहे हैं।
तमिलनाडु की सियासत में 'तमिलगा वेत्री कझगम' (टीवीके) की हालिया चुनावी सफलता ने न केवल विधानसभा के गलियारों में हलचल पैदा की है, बल्कि अब इसका असर राज्य की सार्वजनिक सेवाओं और श्रमिक संगठनों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय की बढ़ती लोकप्रियता अब तमिलनाडु राज्य परिवहन उपक्रमों (एसटीयू) के भीतर एक बड़े संगठनात्मक बदलाव का आधार बन रही है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से मिल रही खबरों के अनुसार, तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम (टीएनएसटीसी) के हजारों चालक और परिचालक अब पारंपरिक यूनियनों को छोड़कर विजय के नेतृत्व वाली पार्टी के बैनर तले एक स्वतंत्र श्रमिक संगठन बनाने की ओर अग्रसर हैं। यह घटनाक्रम राज्य की उन स्थापित राजनीतिक शक्तियों के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है, जिनका दशकों से इन निगमों पर एकाधिकार रहा है।
चुनावी नतीजों के बाद से ही परिवहन विभाग के कर्मचारियों के बीच उत्साह का माहौल देखा गया। कई शाखा कार्यालयों के बाहर कर्मचारियों ने मिठाइयां बांटकर और विजय के पोस्टर लगाकर जीत का जश्न मनाया। इस जमीनी समर्थन को अब एक औपचारिक ढांचे में बदलने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि टीवीके समर्थक कर्मचारी अब टीएनएसटीसी और राज्य एक्सप्रेस परिवहन निगम (एसईटीसी) के भीतर एक ऐसी यूनियन खड़ा करना चाहते हैं, जो डीएमके की एलपीएफ और एआईएडीएमके की एटीपी जैसी शक्तिशाली यूनियनों के समांतर खड़ी हो सके। कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग, जो लंबे समय से खुद को हाशिए पर महसूस कर रहा था, अब विजय के 'थलपति' अवतार में अपनी समस्याओं का समाधान देख रहा है।
इस नई यूनियन के गठन के पीछे केवल राजनीतिक झुकाव ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की दशकों पुरानी लंबित मांगें भी प्रमुख कारण हैं। यूनियन बनाने की पहल करने वाले कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका प्राथमिक उद्देश्य सेवा शर्तों में सुधार, वेतन विसंगतियों को दूर करना और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों को सुनिश्चित करना है। काम के बढ़ते दबाव और तबादलों में होने वाली कथित राजनीति से परेशान चालक और परिचालक अब एक ऐसे विकल्प की तलाश में हैं, जो बिना किसी भेदभाव के उनके अधिकारों की रक्षा कर सके। मेट्टुपालयम शाखा के एक वरिष्ठ चालक ने संकेत दिया कि विजय फैन क्लब से जुड़े हजारों कर्मचारी, जो अब तक मजबूरन अन्य राजनीतिक दलों की यूनियनों का हिस्सा थे, अब सामूहिक रूप से टीवीके के श्रमिक संगठन में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।
पार्टी नेतृत्व की ओर से भी इस दिशा में सकारात्मक संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि टीवीके के वरिष्ठ नेताओं और परिवहन कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच शुरुआती दौर की वार्ता हो चुकी है। यदि यह यूनियन औपचारिक रूप से अस्तित्व में आती है, तो यह तमिलनाडु की ट्रेड यूनियन राजनीति में एक युगांतरकारी बदलाव होगा। यह न केवल राज्य परिवहन निगम की कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य के राजनीतिक समीकरणों में भी टीवीके की पकड़ को और मजबूत करेगा। फिलहाल, चेन्नई से लेकर कन्याकुमारी तक परिवहन विभाग के गलियारों में थलपति विजय के नाम की गूंज और एक नई शुरुआत की सुगबुगाहट तेज हो गई है, जो आने वाले दिनों में एक बड़े संगठनात्मक आंदोलन का रूप ले सकती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
