तमिलनाडु की राजनीति में 'सनातन' पर संग्राम: थलपति विजय की टीवीके सरकार के सामने बड़ी चुनौती
उदयनिधि स्टालिन की सफाई और कैबिनेट मंत्री अधव अर्जुन के बयानों ने बढ़ाई मुख्यमंत्री विजय की मुश्किलें; बीजेपी ने चुप्पी पर उठाए सवाल।

तमिलनाडु की राजनीति के प्रमुख चेहरे (बाएं से दाएं): के. अन्नामलाई, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उदयनिधि स्टालिन|
चेन्नई: दक्षिण भारतीय राजनीति के क्षितिज पर उभरते ही अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय, जिन्हें प्रशंसक 'थलपति' के नाम से जानते हैं, एक ऐसी वैचारिक अग्निपरीक्षा के घेरे में आ गए हैं जिसकी कल्पना शायद उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत में नहीं की थी। तमिलनाडु की नवनिर्वाचित सरकार की देहरी पर पैर रखते ही मुख्यमंत्री विजय के सामने 'सनातन धर्म' के विवाद ने एक विकराल रूप धारण कर लिया है। यह मुद्दा केवल विपक्षी हमलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब उनकी अपनी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) के भीतर और सहयोगी खेमों में भी असंतोष और विरोधाभास की दरारें पैदा कर रहा है।
तमिलनाडु की विधानसभा में पहले ही दिन से 'सनातन के समूल नाश' की गूंज सुनाई देने लगी थी। इस विवाद की आधारशिला द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के उस बयान से पड़ी थी, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म की तुलना बीमारियों से की थी। हालांकि, राजनीतिक दबाव और अपनी मां की धार्मिक आस्थाओं से उपजी चुनौती के बाद स्टालिन के सुर अब बदलते नजर आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान का अर्थ यह कतई नहीं था कि लोग मंदिरों में जाना बंद कर दें। उन्होंने तर्क दिया कि वह केवल उस भेदभाव के विरुद्ध हैं जो समाज को जातियों में विभाजित करता है।
इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने स्टालिन को उनकी मां की धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए घेरा। अन्नामलाई की इस 'चुनौती' ने स्टालिन को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया। स्टालिन ने सफाई देते हुए कहा कि द्रविड़ आंदोलन हमेशा से आलोचनाओं के बीच मजबूत हुआ है और वह केवल पेरियार, अंबेडकर और अन्नादुरई के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को ही आगे बढ़ा रहे हैं।
विवाद की यह आंच अब सीधे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के कैबिनेट तक पहुँच गई है। विपक्षी दल भाजपा लगातार मुख्यमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठा रही थी, लेकिन स्थिति तब और जटिल हो गई जब टीवीके के मुस्लिम विधायक मुस्तफा और कैबिनेट मंत्री अधव अर्जुन ने मोर्चा खोल दिया। अधव अर्जुन ने एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि वे 'हिंदुओं' के खिलाफ नहीं, बल्कि 'हिंदुत्व' के खिलाफ हैं। अर्जुन का दावा है कि उत्तर भारत में सनातन का अर्थ हिंदू धर्म से है, लेकिन तमिलनाडु में इसका अर्थ असमानता है।
कैबिनेट मंत्री के इस बयान ने मुख्यमंत्री विजय की मुश्किलों में इजाफा कर दिया है। एक तरफ जहां विजय एक समावेशी और विकासोन्मुख राजनीति का चेहरा बनने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं उनके मंत्रियों के ऐसे बयान उन्हें एक विशिष्ट वैचारिक कट्टरता की ओर धकेल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु की सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे 'थलपति' के लिए यह वैचारिक संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। क्या विजय अपने मंत्रिमंडल के इन विरोधाभासी सुरों को शांत कर पाएंगे या 'सनातन' का यह विवाद उनकी सरकार की स्थिरता के लिए स्थायी सिरदर्द बन जाएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
