चेन्नई में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय द्वारा मेट्रो परियोजनाओं के निरीक्षण का एक वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। बुधवार को मुख्यमंत्री थलपति विजय ने चेन्नई में चल रहे मेट्रो निर्माण कार्यों, परिचालन तैयारियों और भविष्य की प्रस्तावित विस्तार योजनाओं का जायजा लेने के लिए एक दौरा किया था। इस दौरान उनके पहनावे और निरीक्षण स्थल पर किए गए विशिष्ट इंतजामों को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं और इसे अनावश्यक दिखावा करार दिया है।

सामने आए इस वीडियो में मुख्यमंत्री थलपति विजय काले रंग के सूट और काले चश्मे पहने हुए नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही उनके चलने के लिए रास्ते में विशेष तौर पर रेड कार्पेट बिछाया गया था और इस पूरे दौरे को शूट करने के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया गया था। इस भव्य और फिल्मी अंदाज वाले स्वागत व निरीक्षण को देखकर सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कई यूजर्स ने इस बात पर हैरानी जताई कि एक सामान्य प्रशासनिक और रूटीन निरीक्षण के दौरान इस तरह के महंगे और फिल्मी सेट-अप की क्या आवश्यकता थी।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर करते हुए एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि यह किसी साउथ इंडियन फिल्म का कोई सेट नहीं है, बल्कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं जो राज्य में बन रहे प्रोजेक्ट्स का जायजा लेने निकले हैं। यूजर ने इसमें रेड कार्पेट, ड्रोन शूट और काले सूट-चश्मे के साथ किए गए निरीक्षण पर कटाक्ष किया। वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि मुख्यमंत्री का यह शानदार आगमन और भव्य एंट्री इंटरनेट का ध्यान खींच रही है, लेकिन यह सवाल भी खड़े कर रही है कि क्या प्रशासनिक कार्यों के लिए ऐसे दिखावे सचमुच जरूरी हैं।

एक अन्य यूजर ने कटाक्ष करते हुए इसे 'विजय मार्क' रेड कार्पेट इंस्पेक्शन का नाम दिया। उन्होंने लिखा कि चेन्नई में विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए अधिकारियों द्वारा ग्रीन मैट और रेड कार्पेट बिछाकर सिनेमा जैसा सेट-अप तैयार किया गया, जिस पर चलकर मुख्यमंत्री ने निरीक्षण किया और फिर इसे सोशल मीडिया रील्स के रूप में वायरल कर दिया गया। कुछ लोगों ने इसकी तुलना करते हुए कहा कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री जब जमीन पर उतरते हैं, तो इस तरह का तामझाम देखने को नहीं मिलता। एक महिला यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यह भी लिखा कि अधिकांश जमीनी मेहनत और कार्य तो पहले की सरकारों और प्रशासनिक अमले द्वारा किया जाता है, ऐसे में इस तरह के आयोजनों से ऐसा प्रतीत होता है कि धरातल के काम से ज्यादा ध्यान विज्ञापनों और दिखावे पर दिया जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया मंचों पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच इस तरह के भव्य और फिल्मी अंदाज से बचना चाहिए। आलोचकों का मानना है कि प्रशासनिक दौरों की सादगी जनता से जुड़ाव को मजबूत करती है, जबकि इस तरह के अति-विशिष्ट इंतजाम जनता और नेतृत्व के बीच की दूरी को बढ़ाते हैं। फिलहाल इस वीडियो को लेकर इंटरनेट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है और यह राजनीतिक विश्लेषकों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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