जनादेश का अपमान हुआ तो खाली हो जाएगी विधानसभा: विजय के 108 शेरों ने दी इस्तीफे की ललकार!
बहुमत के आंकड़ों पर फंसा पेंच, राज्यपाल के फैसले के खिलाफ अदालत जा सकती है थलापति विजय की पार्टी टीवीके।

चेन्नई में आयोजित जनसभा के दौरान समर्थकों का अभिवादन स्वीकार करते तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) प्रमुख सी. जोसेफ विजय।
तमिलनाडु की सियासत इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां हर बीतता लम्हा नए समीकरण गढ़ रहा है। विधानसभा चुनाव के नतीजों ने अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) को 108 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में स्थापित किया है, लेकिन सत्ता की दहलीज तक पहुंचने का रास्ता कांटों भरा नजर आ रहा है। चेन्नई के गलियारों में हलचल तब तेज हो गई जब यह खबर फैली कि दशकों तक एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) पर्दे के पीछे हाथ मिला सकते हैं। इस संभावित साठगांठ की भनक लगते ही विजय की पार्टी ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। TVK ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जनता के जनादेश का अपमान कर DMK और AIADMK ने किसी भी तरह की 'अप्राकृतिक' गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश की, तो TVK के सभी 108 विधायक सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देंगे।
इस राजनीतिक ड्रामे का केंद्र राजभवन बना हुआ है। राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर ने विजय को सरकार बनाने का न्योता देने से फिलहाल इनकार कर दिया है, जिसका मुख्य कारण बहुमत के जादुई आंकड़े का न होना है। तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। TVK के पास 108 सीटें हैं और उसे कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन हासिल है, जिससे उनकी संख्या 113 तक पहुंचती है। बहुमत के लिए अभी भी 5 और विधायकों की दरकार है। राज्यपाल का तर्क है कि जब तक विजय 118 विधायकों का स्पष्ट समर्थन पत्र पेश नहीं करते, उन्हें सरकार बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दूसरी ओर, TVK के रणनीतिकारों का मानना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते संवैधानिक परंपराओं के अनुसार उन्हें पहले मौका मिलना चाहिए और सदन के पटल पर बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। इस कानूनी पेंच के खिलाफ अब विजय की पार्टी ने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाने का मन बना लिया है।
सियासी बिसात पर सबसे चौंकाने वाला पहलू DMK और AIADMK के बीच का संभावित समझौता है। सूत्रों की मानें तो डीएमके के भीतर एक बड़ा खेमा, विशेषकर उदयनिधि स्टालिन के समर्थक, विजय के बढ़ते राजनीतिक कद से डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि यदि विजय एक बार सत्ता में आ गए, तो वे एमजी रामचंद्रन (MGR) की तरह अजेय हो जाएंगे, जिन्होंने अपने दौर में डीएमके को दशकों तक सत्ता से दूर रखा था। इस डर ने दोनों द्रविड़ प्रतिद्वंद्वियों को एक मेज पर ला खड़ा किया है। चर्चा है कि एक ऐसी सरकार की रूपरेखा तैयार की जा रही है जिसमें ई. पलानीस्वामी मुख्यमंत्री बन सकते हैं और डीएमके उन्हें बाहर से समर्थन देगी। हालांकि, एम.के. स्टालिन अभी भी इस फैसले पर दुविधा में हैं क्योंकि उन्हें डर है कि धुर विरोधी पार्टियों के एक साथ आने पर जनता में बेहद नकारात्मक संदेश जाएगा और भविष्य में उनके वोट बैंक को भारी नुकसान हो सकता है।
फिलहाल तमिलनाडु में 'वेट एंड वॉच' की स्थिति बनी हुई है। AIADMK ने अपने विधायकों को एकजुट रहने और अगले दो दिनों तक शांत रहने के निर्देश दिए हैं, जबकि DMK ने अपने विधायकों को 10 मई तक चेन्नई छोड़ने से मना किया है। वामपंथी दलों ने राज्यपाल के रवैये की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विधायकों के इस्तीफे की नौबत आती है, तो राज्य संवैधानिक संकट की ओर बढ़ सकता है। थलापति विजय की यह 'इस्तीफा पॉलिटिक्स' सीधे तौर पर जनता की सहानुभूति बटोरने और द्रविड़ दलों को बैकफुट पर धकेलने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है। आने वाले 48 घंटे यह तय करेंगे कि तमिलनाडु की सत्ता पर किसका राज होगा या फिर राज्य एक बार फिर चुनाव की आग में झोंक दिया जाएगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
