तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार को उस समय ऐतिहासिक मोड़ आ गया जब लंबे समय से कोलाथुर सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। शुरुआती मतगणना रुझानों में ही स्टालिन के पिछड़ने के संकेत मिलने लगे थे, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, यह स्पष्ट होता गया कि यह केवल शुरुआती झटका नहीं, बल्कि एक बड़ा सियासी बदलाव है।

कोलाथुर, जिसे स्टालिन का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है और जहां से वे 2011 से लगातार जीत दर्ज करते आए थे, वहीं इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई। शुरुआती दौर में ही वह तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के उम्मीदवार वी. एस. बाबू से पीछे चल रहे थे। मतों का अंतर लगातार बदलता रहा, लेकिन अंतिम चरण में यह तय हो गया कि स्टालिन इस सीट को बचाने में सफल नहीं हो सके। इसके साथ ही वे तमिलनाडु के उन गिने-चुने मुख्यमंत्रियों में शामिल हो गए हैं, जिन्हें पद पर रहते हुए विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

राज्यभर में भी तस्वीर डीएमके के लिए अनुकूल नहीं दिखी। मतगणना के दौरान स्पष्ट हुआ कि सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम कई सीटों पर पिछड़ रही है और उसे व्यापक नुकसान झेलना पड़ रहा है। दूसरी ओर, अभिनेता विजय के नेतृत्व वाली पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम ने अप्रत्याशित रूप से मजबूत प्रदर्शन करते हुए राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।

शाम 4:15 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, TVK ने 11 सीटों पर जीत दर्ज कर ली थी और 96 अन्य सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी। इसके मुकाबले डीएमके केवल 4 सीटों पर जीत हासिल कर सकी और 67 सीटों पर आगे चल रही थी। तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का बहुमत आवश्यक होता है, और मौजूदा रुझानों ने सत्ता समीकरण को पूरी तरह से अनिश्चित बना दिया है।

चुनाव परिणामों के बीच TVK के नेताओं ने आत्मविश्वास जताते हुए दावा किया कि पार्टी अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच सकती है। पार्टी के प्रतिनिधि फेलिक्स जेराल्ड ने कहा कि यह परिणाम पहले से अपेक्षित थे और राज्य में एक ‘साइलेंट विजय वेव’ चल रही थी, जो अब स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जनता पारंपरिक दलों से असंतुष्ट थी और बदलाव चाहती थी।

इस चुनाव ने तमिलनाडु की पारंपरिक द्विदलीय राजनीति को चुनौती दी है, जहां लंबे समय से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है। इस बार उभरती TVK ने इस समीकरण को त्रिकोणीय बना दिया है और राज्य की राजनीति में एक नई दिशा की शुरुआत का संकेत दिया है। हालांकि मतगणना के दौरान रुझान लगातार बदलते रहते हैं और शुरुआती बढ़त अंतिम परिणाम की गारंटी नहीं होती, लेकिन इस बार के आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोलाथुर में स्टालिन की हार केवल एक सीट का नुकसान नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है। यह परिणाम तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है, जिसके प्रभाव आने वाले समय में और स्पष्ट होंगे।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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