तमिलनाडु विधानसभा में गुरुवार (18 जून 2026) को राज्यपाल आर. एन. रवि के उत्तराधिकारी और वर्तमान राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के संबोधन के दौरान सामाजिक न्याय और जातिगत प्रतिनिधित्व का मुद्दा प्रमुखता से उभरा। अपने अभिभाषण में राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार केंद्र सरकार से देशभर में चल रही जनगणना प्रक्रिया के तहत जातिगत गणना (कास्ट एन्यूमरेशन) को शीघ्र पूरा करने का आग्रह करेगी।

राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार की मूल नीति यह है कि वास्तविक सामाजिक न्याय तभी सुनिश्चित हो सकता है जब समाज के प्रत्येक वर्ग और समुदाय को उसका उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त हो। उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार द्वारा जातिगत गणना पूरी किए जाने के बाद तमिलनाडु सरकार राज्य स्तर पर एक व्यापक ‘सोशल जस्टिस सर्वे’ भी आयोजित करेगी। यह सर्वे विभिन्न समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का विस्तृत आकलन करने के उद्देश्य से किया जाएगा।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने संकेत दिया कि तमिलनाडु सरकार लंबे समय से जाति आधारित आंकड़ों को सामाजिक न्याय की नीतियों का महत्वपूर्ण आधार मानती रही है। इसी कारण राज्य सरकार केंद्र से जातिगत आंकड़ों के संग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने और समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग करेगी। सरकार का मानना है कि व्यापक और सटीक जातिगत आंकड़े कल्याणकारी योजनाओं, आरक्षण नीति और सामाजिक समानता से जुड़े निर्णयों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

दरअसल, तमिलनाडु देश के उन राज्यों में शामिल रहा है जो लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना की मांग करते रहे हैं। राज्य सरकार का तर्क है कि वर्तमान समय में उपलब्ध जातिगत आंकड़े पुराने हो चुके हैं और नई सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को समझने के लिए अद्यतन डेटा की आवश्यकता है। ऐसे आंकड़े आरक्षण व्यवस्था के मूल्यांकन, सरकारी योजनाओं के लक्षित क्रियान्वयन, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी नीतियों के निर्माण और विभिन्न समुदायों के बीच मौजूद सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को मापने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इस वर्ष की शुरुआत में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार द्वारा आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत किया था। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि जातिगत गणना की कार्यप्रणाली, श्रेणियों और दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने से पहले राज्यों के साथ व्यापक परामर्श किया जाए।

अपने पत्र में मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा था कि जातिगत गणना का सामाजिक न्याय और समान अवसर आधारित नीति निर्माण पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने इस प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी और पारदर्शिता के साथ संचालित किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया था, ताकि आंकड़ों की विश्वसनीयता बनी रहे और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

वर्तमान में राष्ट्रीय जनगणना कई चरणों में संचालित की जा रही है और जातिगत आंकड़ों का संग्रह जनसंख्या गणना के दौरान किए जाने की संभावना है। हालांकि केंद्र सरकार को अभी भी प्रक्रिया से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं, जैसे जाति संबंधी सूचनाओं के वर्गीकरण और रिकॉर्डिंग की पद्धति, को अंतिम रूप देना है। तमिलनाडु सरकार चाहती है कि यह पूरी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो ताकि प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भविष्य की सार्वजनिक नीतियों और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों में किया जा सके।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जातिगत आंकड़े भविष्य में आरक्षण नीतियों, कल्याणकारी योजनाओं के वितरण, विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधित्व, सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों तथा पिछड़े वर्गों के कल्याण और सकारात्मक भेदभाव (अफर्मेटिव एक्शन) से जुड़े विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं।

तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल के इस बयान को राज्य सरकार की उस निरंतर रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत वह केंद्र सरकार पर जातिगत गणना को प्राथमिकता देने और इसे शीघ्र पूरा करने के लिए दबाव बनाए रखना चाहती है। आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति और सामाजिक न्याय से जुड़ी बहसों के केंद्र में बना रह सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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