भ्रष्ट पार्टी है टीएमसी-'कोई पार्टी आपको नहीं चाहती': महुआ मोइत्रा पर सुष्मिता देव का बड़ा जुबानी प्रहार।
पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने बीजेपी में शामिल होने के बाद टीएमसी पर निशाना साधा और प्रधानमंत्री मोदी के विकास मॉडल की प्रशंसा की।

टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाली सुष्मिता देव और महुआ मोइत्रा की फाइल फोटो।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में फेरबदल का दौर जारी है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुईं पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी बदलने के कुछ घंटों के भीतर ही अपनी पूर्व पार्टी और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर तीखा हमला बोला है। सुष्मिता देव ने महुआ मोइत्रा के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे कभी बीजेपी में शामिल नहीं होंगी। देव ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि महुआ मोइत्रा की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें कोई भी राजनीतिक दल अपने साथ लेने को तैयार नहीं है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन तृणमूल कांग्रेस में रहना पड़ रहा है।
सुष्मिता देव ने टीएमसी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन और विकास मॉडल के कारण ही बीजेपी ने ओडिशा, बंगाल, त्रिपुरा और असम जैसे राज्यों में जनता का भारी समर्थन हासिल किया है। देव ने इस बात पर जोर दिया कि देश के इतिहास में कोई भी दूसरी पार्टी उस स्तर पर काम नहीं कर पाई है, जिस तरह से मौजूदा सरकार ने अंतिम छोर तक सेवाओं को पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने टीएमसी के कार्यप्रणाली की तुलना में बीजेपी के शासन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बताया।
इस घटनाक्रम से पहले, सुष्मिता देव ने 10 जून को तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। इस्तीफे के बाद उन्होंने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की थी। सुष्मिता देव के अलावा, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक ने भी गुरुवार को बीजेपी का दामन थाम लिया। भारतीय जनता पार्टी ने इन तीनों नेताओं को शामिल करने के कुछ घंटों बाद ही राज्यसभा की खाली हुई तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।
मौजूदा विधानसभा समीकरणों के अनुसार, इन तीनों सीटों पर बीजेपी की जीत की प्रबल संभावना जताई जा रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी के पास वर्तमान में 208 विधायक हैं। गणितीय आंकड़ों को देखा जाए, तो किसी भी विपक्षी उम्मीदवार को भाजपा के प्रत्याशी को हराने के लिए कम से कम 70 वोटों की आवश्यकता होगी। यह राजनीतिक घटनाक्रम न केवल बंगाल की सक्रिय राजनीति में एक बड़ा बदलाव है, बल्कि आगामी राज्यसभा उपचुनाव के नतीजों के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
