तमिलनाडु की सियासत में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से उस समय एक बड़ा झटका लगा, जब शीर्ष अदालत ने डीएमके नेता और पूर्व मंत्री ईवी वेलु के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को हटाने से साफ इनकार कर दिया। तमिलनाडु सरकार, जिसका नेतृत्व वर्तमान मुख्यमंत्री थलपति सी जोसेफ विजय की टीवीके सरकार कर रही है, ने मद्रास हाई कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम राहत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार की इस अपील को खारिज कर दिया।

पूरा मामला पूर्व मंत्री ईवी वेलु के कार्यकाल से जुड़ा है, जिन पर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में बड़ी अनियमितताओं का आरोप है। राज्य के डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (DVAC) ने इस मामले में 25 जून 2026 को एफआईआर दर्ज की थी। इस घोटाले की जड़ें 2022 में अराप्पोर लियक्कम नाम के एक एनजीओ द्वारा की गई शिकायत में हैं, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सड़क निर्माण का काम शुरू होने से पहले ही ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचा। मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में वेलु को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, जिसे हटाने के लिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मद्रास हाई कोर्ट ने बिना मांगे ही गिरफ्तारी पर पूरी तरह से रोक (ब्लैंकेट बैन) लगा दी है। उन्होंने तर्क दिया कि आपराधिक कार्रवाई रोकने की याचिकाओं को अग्रिम जमानत का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। वहीं, डीएमके नेता की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद से ही उनके मुवक्किल को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए स्पष्ट किया कि ईवी वेलु को जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग करना होगा। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि जांच एजेंसी उन्हें पहले ही बुला चुकी है, इसलिए उन्हें जांच प्रक्रिया में शामिल होना ही होगा। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार की गिरफ्तारी पर रोक हटाने वाली याचिका को स्वीकार नहीं किया। यह कानूनी लड़ाई राज्य में बढ़ते राजनीतिक तनाव और प्रशासनिक उठापटक का एक बड़ा हिस्सा मानी जा रही है, जो आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति को और अधिक प्रभावित कर सकती है।


Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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