डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले कांग्रेस आलाकमान ने कार्यवाहक सीएम सिद्धारमैया को राष्ट्रीय संगठन की सर्वोच्च नीति-निर्धारक इकाई में शामिल किया।

बेंगलुरु/नई दिल्ली: कर्नाटक की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में नए मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार के शपथ लेने से ठीक पहले कांग्रेस आलाकमान ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। पार्टी ने निवर्तमान और कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री देते हुए कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) का सदस्य नियुक्त किया है। कांग्रेस में तमाम नीतिगत और बड़े फैसले लेने वाली इस सर्वोच्च इकाई में सिद्धारमैया को शामिल करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी उनके अनुभव और क्षेत्रीय प्रभाव को केंद्र में भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

यह राजनीतिक फेरबदल ऐसे समय पर हुआ है जब कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डीके शिवकुमार बेंगलुरु में भव्य समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पद की गोपनीयता की शपथ लेने जा रहे हैं। बुधवार शाम ठीक 4:05 बजे होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह में 64 वर्षीय डीके शिवकुमार राज्य की कमान आधिकारिक तौर पर संभालेंगे। इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत देश भर के दिग्गज कांग्रेसी नेता बेंगलुरु पहुंच रहे हैं।

कुरुबा समुदाय से CWC तक का सफर और जमीनी संघर्ष

सिद्धारमैया का राजनीतिक सफर भारतीय लोकतंत्र की उस ताकत को दर्शाता है जहां एक सामान्य पृष्ठभूमि का व्यक्ति अपनी काबिलियत के दम पर शिखर तक पहुंच सकता है। उनका जन्म अत्यंत पिछड़े वर्ग के तहत आने वाले कुरुबा गौड़ा के एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। बचपन में आर्थिक तंगहाली के कारण वे भेड़ चराने का काम करते थे। हालात ऐसे थे कि वे 10 साल की उम्र तक स्कूल की दहलीज भी नहीं लांघ पाए थे। हालांकि, पढ़ाई के प्रति उनकी लगन ने उन्हें रुकने नहीं दिया। बाद में उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक (BSc) और कानून की डिग्री (LLB) हासिल की और कुछ समय तक वकालत की बारीकियों को भी समझा।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश और आपसी सहमति के फॉर्मूले के तहत सिद्धारमैया ने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, जिसके बाद डीके शिवकुमार के लिए कमान संभालने का रास्ता साफ हुआ। उनके इसी त्याग और वरिष्ठता का सम्मान करते हुए आलाकमान ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

राजनीतिक रिकॉर्ड और मजबूत सांगठनिक अनुभव

सिद्धारमैया के संसदीय करियर की शुरुआत साल 1983 में हुई थी, जब उन्होंने भारतीय लोक दल के टिकट पर अपनी पहली चुनावी जीत दर्ज की थी। इसके बाद वे दो बार कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा से वैचारिक मतभेदों के चलते वे साल 2006 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। कांग्रेस ने उनकी सांगठनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें राज्य का नेतृत्व सौंपा।

वे साल 2013 से 2018 तक पहली बार और फिर मई 2023 से मई 2026 तक दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। कर्नाटक की अमूमन अस्थिर मानी जाने वाली राजनीति में उन्होंने पांच साल का अपना पहला कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा कर अपना राजनीतिक करिश्मा साबित किया था। उनके नाम कर्नाटक विधानसभा में एक अनूठा और बड़ा रिकॉर्ड दर्ज है; उन्होंने राज्य का बजट 13 से ज्यादा बार पेश किया है, जो उनकी आर्थिक नीतियों पर मजबूत पकड़ को दर्शाता है।

इस नई नियुक्ति के बाद अब सिद्धारमैया केंद्र में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। इससे पहले राजनीतिक गलियारों में उनके राज्यसभा जाने की अटकलें भी तेज थीं, जिसके नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून तय की गई है। सिद्धारमैया को सीडब्ल्यूसी का सदस्य बनाकर कांग्रेस ने न केवल कर्नाटक के भीतर सत्ता हस्तांतरण के संतुलन को साधे रखा है, बल्कि आगामी राष्ट्रीय चुनौतियों के लिए दक्षिण भारत के एक कद्दावर चेहरे को दिल्ली दरबार में अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर दिया है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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