महाराष्ट्र में कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की अटकलों के बीच भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने किसी भी भूमिका से इनकार किया है। वहीं संजय राउत ने सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की खबरों ने राज्य के राजनीतिक अटकलों में एक नया मोड़ लेकर आईं हैं। इन ख़बरों से महाराष्ट्र की राजनीती में एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत कथित रूप से कई सांसदों का एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की अटकलों के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप चरम पर पहुंच गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने 2022 में हुई शिवसेना की ऐतिहासिक बगावत और सत्ता परिवर्तन की यादें भी ताजा कर दी हैं।


विवाद उस समय और गहरा गया जब महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने स्पष्ट रूप से कहा कि शिवसेना (यूबीटी) में किसी भी संभावित टूट या दल-बदल की कोशिश से भारतीय जनता पार्टी का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें भाजपा पर उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों को तोड़ने का आरोप लगाया जा रहा है। बावनकुले ने कहा कि यदि कोई सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट की ओर जाता है तो यह शिवसेना का आंतरिक मामला है और इसे भाजपा से जोड़ना गलत होगा।

दरअसल, राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शिवसेना (यूबीटी) के छह से सात लोकसभा सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और किसी बड़े राजनीतिक कदम की तैयारी चल रही है। इसी संभावित घटनाक्रम को विपक्षी खेमे और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं द्वारा ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया गया है। माना जा रहा है कि यदि इतनी संख्या में सांसद एक साथ पाला बदलते हैं तो इसका महाराष्ट्र की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी के सांसदों को तोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। राउत के अनुसार सांसदों को पक्ष बदलने के बदले कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई है, जबकि लगभग 15 करोड़ रुपये अग्रिम राशि के रूप में देने की बात भी कही गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को दिल्ली ले जाने के लिए चार्टर्ड विमान तक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राउत का दावा है कि इस पूरे अभियान का उद्देश्य शिवसेना (यूबीटी) को कमजोर करना और अंततः उसे राजनीतिक रूप से समाप्त करना है।

हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अब तक कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है और भाजपा लगातार इन आरोपों से इनकार करती रही है। दूसरी ओर, पार्टी में संभावित बगावत की खबरों के बाद शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व सक्रिय हो गया है। पार्टी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया, कई बैठकें आयोजित कीं और सार्वजनिक रूप से एकजुटता का प्रदर्शन कर यह संदेश देने की कोशिश की कि संगठन अभी भी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में मजबूती से खड़ा है।

राजनीतिक संकट की आशंकाओं के बीच संजय राउत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की। मुलाकात के बाद राउत ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें आश्वस्त किया है कि यदि किसी तरह का विभाजन या अलग गुट मान्यता पाने की कोशिश करता है तो निर्णय लेते समय कानून, नियमों और संवैधानिक प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। राउत ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष एक सम्मानित व्यक्ति हैं और उन्हें भरोसा है कि इस मामले में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का ध्यान रखा जाएगा।

इसी क्रम में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि यदि पार्टी के कुछ सांसद अलग गुट बनाने का प्रयास करें तो उसे मान्यता देने से पहले सभी संवैधानिक और कानूनी पहलुओं की गंभीरता से समीक्षा की जाए। वहीं संजय राउत ने यह भी कहा कि यदि कोई सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देकर जनता के बीच जाना चाहिए और नया जनादेश हासिल करना चाहिए।

फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। न तो किसी आधिकारिक विभाजन की घोषणा हुई है और न ही किसी नए गुट को मान्यता मिली है। भाजपा नेतृत्व इस पूरे मामले से दूरी बना रहा है, जबकि शिवसेना (यूबीटी) अपने सांसदों की निष्ठा को लेकर आश्वस्त होने का दावा कर रही है। इसके बावजूद महाराष्ट्र की राजनीति में अनिश्चितता बनी हुई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में क्या वास्तव में कोई बड़ा दल-बदल सामने आता है या फिर ‘ऑपरेशन टाइगर’ केवल राजनीतिक अटकलों तक ही सीमित रह जाता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story