अयोध्या के राम मंदिर निर्माण और वहां श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस पूरे प्रकरण पर शिवसेना (यूबीटी) ने तीखा रुख अख्तियार करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय के माध्यम से बीजेपी को घेरा है और मंदिर के दान-पात्रों से नकदी, सोना, चांदी और आभूषणों की कथित चोरी की घटनाओं को कानून-व्यवस्था की विफलता करार दिया है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत की ओर से मुखर की गई इस टिप्पणी ने सियासी गलियारों में बहस तेज कर दी है।

संपादकीय में सीधे तौर पर बीजेपी पर निशाना साधते हुए इसे 'राम मंदिर की लूट' की संज्ञा दी गई है। पार्टी का तर्क है कि जिस राम मंदिर के निर्माण के लिए वर्षों तक कार सेवकों ने संघर्ष किया और बलिदान दिए, उसी मंदिर की सुरक्षा और संपत्ति अब सुरक्षित नहीं है। संपादकीय में तुलना करते हुए यह तक कहा गया है कि जिस प्रकार महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा था, वैसी ही स्थिति आज राम मंदिर के संदर्भ में देखने को मिल रही है। इस तीखे बयान ने धार्मिक आस्था और राजनीतिक शुचिता को लेकर बड़े प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

इस मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सीधा हमला बोला है। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि बीते एक दशक के दौरान देश के कई महत्वपूर्ण मंदिरों में चोरी और लूट की घटनाएं दर्ज की गई हैं, लेकिन इन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पार्टी का दावा है कि इन कथित मामलों में शामिल लोग बीजेपी से जुड़े हुए हैं। साथ ही, अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा गया कि वे उद्धव ठाकरे पर कांग्रेस के साथ होने का आरोप लगाने के बजाय अपनी पार्टी के भीतर उठ रहे इन सवालों का जवाब देने में चुप्पी साधे हुए हैं। कोल्हापुर में अमित शाह की रैली के बाद आया यह बयान दोनों धड़ों के बीच जारी वाकयुद्ध को और तेज करता है।

कानूनी और व्यवस्थागत नजरिए से देखें तो मंदिर जैसे संवेदनशील स्थानों पर दान-पात्रों की सुरक्षा एक प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। शिवसेना (यूबीटी) का स्पष्ट आरोप है कि राम मंदिर में हुई कथित चोरी कानून-व्यवस्था के पूर्ण पतन को प्रदर्शित करती है। पार्टी ने अंबाबाई मंदिर के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए बीजेपी के विकास के दावों को भी चुनौती दी है। संपादकीय में यह दावा किया गया है कि लोकतंत्र और धार्मिक आस्था, दोनों पर हमला हो रहा है, जिसे नजरअंदाज करना उचित नहीं है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी की ओर से औपचारिक जवाब का इंतजार है, लेकिन इस विवाद ने आने वाले समय में राजनीतिक तनाव को बढ़ाने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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