नए संसद भवन में नहीं मिलता अपनापन, शशि थरूर बोले- ‘भावशून्य सम्मेलन केंद्र’ जैसा माहौल, घटा आपसी संवाद|
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन के डिजाइन, सेंट्रल हॉल की कमी और अनौपचारिक संवाद घटने को लेकर अपनी बात रखी।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान नए संसद भवन में अपनापन और अनौपचारिक संवाद की कमी को लेकर अपनी टिप्पणी रखी।
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद और केरल की तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि नए संसद भवन में उन्हें पुराने संसद भवन जैसा अपनापन महसूस नहीं होता। उनके मुताबिक, नए भवन की बनावट और वहां की व्यवस्था ने सांसदों के बीच होने वाली अनौपचारिक बातचीत और आपसी जुड़ाव को कम किया है। थरूर ने इस बदलाव को देश की मौजूदा राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण से भी जोड़कर देखा।
शशि थरूर ने नए संसद भवन को एक तरह का ‘भावशून्य सम्मेलन केंद्र’ बताया। उन्होंने कहा कि भवन की ऊंची छत और पंखे जैसी बनावट के कारण वहां वह आत्मीयता महसूस नहीं होती, जो पुराने संसद भवन के चैंबर में दिखाई देती थी। उनके अनुसार, पुराने संसद भवन में सांसदों के बीच बातचीत और विचारों के आदान-प्रदान के लिए अधिक सहज माहौल था।
थरूर ने ये बातें पत्रकार और लेखिका शोभना के. नायर की किताब **‘हाउसिंग द रिपब्लिक: अ बायोग्राफी ऑफ द इंडियन पार्लियामेंट’** के विमोचन कार्यक्रम के दौरान कहीं। उन्होंने संसद भवन में हुए बदलावों पर बात करते हुए कहा कि राजधानी में अपनी भौतिक छाप छोड़ने की एक खास इच्छा रही है, लेकिन हर बदलाव जरूरी नहीं होता।
2023 में हुआ था नए संसद भवन का उद्घाटन
नए संसद भवन का उद्घाटन 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यह भवन सेंट्रल विस्टा कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है। नए भवन को पुराने सरकारी भवनों की जगह आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किए गए परिसर के रूप में पेश किया गया था।
हालांकि, शशि थरूर ने नए भवन की कुछ व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने खास तौर पर पुराने संसद भवन के **सेंट्रल हॉल** का जिक्र किया। उनके मुताबिक, पुराने सेंट्रल हॉल में मौजूदा और पूर्व सांसदों, पर्यवेक्षकों तथा पुराने समय के मीडियाकर्मियों के बीच अनौपचारिक बातचीत का अवसर मिलता था।
थरूर का कहना है कि नए संसद भवन में इस तरह का सेंट्रल हॉल नहीं है। उनके मुताबिक, इसके कारण अलग-अलग राजनीतिक दलों के सदस्यों के बीच अनौपचारिक मेलजोल और बातचीत के मौके कम हुए हैं। उन्होंने कहा कि संसद में केवल औपचारिक बहस ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि सांसदों के बीच होने वाली सहज बातचीत भी संसदीय माहौल का हिस्सा होती है।
लोकसभा की सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी टिप्पणी
शशि थरूर ने लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 850 करने के प्रस्ताव को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि निचले सदन में अधिक सदस्यों के लिए जगह बनाई जा सकती है, लेकिन केवल जगह उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि सांसदों की संख्या काफी बढ़ जाती है, तो सार्थक संसदीय चर्चा और विचार-विमर्श की भावना प्रभावित हो सकती है। थरूर ने इस संदर्भ में सांसदों के एक-दूसरे से परिचित होने और उनके बीच संवाद की अहमियत पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि सांसद केवल बड़ी संख्या में मौजूद लोगों की भीड़ बनकर न रह जाएं। उनके मुताबिक, संसद का उद्देश्य केवल बैठकों में शामिल होना नहीं, बल्कि विचारों पर चर्चा और अलग-अलग पक्षों के बीच संवाद भी है।
नए भवन की एक सुविधा की तारीफ भी की
नए संसद भवन की आलोचना करने के साथ ही शशि थरूर ने इसकी एक व्यवस्था की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि पुराने संसद भवन में बैठने की जगह को लेकर काफी परेशानी होती थी। सांसदों को कई बार बहुत कम जगह में बैठना पड़ता था और गलियारे तक पहुंचने के लिए अपने साथ बैठे सदस्यों के बीच से होकर निकलना पड़ता था।
थरूर के अनुसार, नए संसद भवन में यह समस्या दूर हो गई है। यानी उन्होंने नए भवन की कुछ सुविधाओं को बेहतर माना, लेकिन इसके डिजाइन और अनौपचारिक संवाद के लिए उपलब्ध जगहों को लेकर अपनी चिंता स्पष्ट की।
कार्यक्रम में मौजूद राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने भी नए संसद भवन की बनावट की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कोई भी चीज पसंद नहीं है।
शशि थरूर की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब संसद भवन की संरचना, संसदीय प्रतिनिधित्व और सांसदों के बीच संवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा जारी है। थरूर ने अपने बयान में पुराने संसद भवन के उस माहौल को याद किया, जिसमें औपचारिक कार्यवाही के साथ अनौपचारिक बातचीत और आपसी संपर्क के लिए भी जगह थी। उनके अनुसार, नए भवन में सुविधाओं का विस्तार हुआ है, लेकिन अपनापन और सहज संवाद से जुड़ी कुछ पुरानी विशेषताएं कम महसूस होती हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
