भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के नए पदाधिकारियों की घोषणा की है, जिसमें देशभर के युवा नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वडोदरा से सांसद हेमांग जोशी ने इस नई टीम के नामों की आधिकारिक घोषणा की। इस विस्तार के तहत सात युवा नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तीन अन्य नेताओं को राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में चुना गया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए गए इन सात प्रमुख चेहरों में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ से भाजपा की विधायक शगुन परिहार का नाम भी शामिल है। अपनी इस नई संगठनात्मक जिम्मेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए शगुन परिहार ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल शर्मा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और देश की जनता का आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने यह संकल्प भी दोहराया कि वे अपनी इस नई भूमिका को पूरी निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ निभाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेंगी।

शगुन परिहार वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं और वह पहली बार विधायक चुनकर आई हैं। इतनी कम उम्र में मिली सफलता के बाद वे जम्मू-कश्मीर में पार्टी का एक प्रमुख और उभरता हुआ युवा चेहरा बन चुकी हैं। युवा मोर्चा की राष्ट्रीय इकाई में उनकी इस नियुक्ति को चिनाब घाटी क्षेत्र के स्थानीय युवा नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। शगुन परिहार ने वर्ष 2024 में जीवन का अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था और अपने पहले ही प्रयास में किश्तवाड़ सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। महज 29 साल की उम्र में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँचने वाली शगुन परिहार जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में सबसे कम उम्र की विधायक बनी हैं।

राजनीति की इस कठिन राह पर आने से पहले शगुन परिहार को अपनी व्यक्तिगत जिंदगी में एक बहुत बड़े और दर्दनाक हादसे का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2018 में जम्मू-कश्मीर में होने वाले पंचायत चुनावों से ठीक कुछ दिन पहले उनके पिता अजीत परिहार, जो स्वयं भारतीय जनता पार्टी के एक पदाधिकारी थे, और उनके चाचा अनिल परिहार की हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। अपने परिवार पर टूटे इस पहाड़ जैसे दुख और भयंकर त्रासदी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी शिक्षा को जारी रखा। जब वे पहली बार विधायक के रूप में चुनी गईं, उस समय वे अपनी पीएचडी की पढ़ाई पूरी कर रही थीं।

किश्तवाड़ सीट से शगुन परिहार की यह जीत राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि किश्तवाड़ एक मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र है। इस सामाजिक ताने-बाने के बावजूद जनता ने भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार शगुन परिहार पर अपना भरोसा जताया। इस कांटे की टक्कर वाले चुनाव में उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जाद अहमद किचलू को मात्र 521 वोटों के बहुत ही छोटे अंतर से पराजित किया। इस चुनाव में शगुन परिहार को कुल 29,053 वोट हासिल हुए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी सज्जाद अहमद किचलू को 28,532 वोट मिले थे।

महज 29 साल की उम्र में अचानक चुनावी राजनीति के मैदान में उतरना शगुन परिहार की मूल योजना का हिस्सा कभी नहीं था। राजनीति में आने से पहले वे पूरी तरह से अपनी पढ़ाई-लिखाई और करियर में व्यस्त थीं। उन्होंने इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम्स में एम.टेक की डिग्री हासिल की है और वे इलेक्ट्रॉनिक्स विषय में पीएचडी की पढ़ाई कर रही थीं। इसके साथ ही वे जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में भी जुटी हुई थीं। शुरुआत में उनका राजनीति में कदम रखने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन अपने क्षेत्र और समाज के प्रति कर्तव्य की भावना तथा परिवार की राजनीतिक विरासत की वजह से आखिरकार उन्हें इस सार्वजनिक जीवन के रास्ते को चुनना पड़ा।

पार्टी को यह पूरी उम्मीद थी कि शगुन परिहार क्षेत्र की बड़ी मुस्लिम आबादी और छोटे हिंदू समुदाय के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने और एकता की भावना को बढ़ावा देने में सफल होंगी। अपने पहले ही चुनावी प्रचार के दौरान शगुन परिहार ने आतंकवाद और उसके दंश को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया था। उन्होंने जनता के बीच स्पष्ट रूप से कहा था कि यह चुनाव उन लोगों के खिलाफ है जिन पर हिंसा फैलाने और लोगों को लूटने के आरोप लगे हैं, जबकि दूसरी तरफ वे लोग खड़े हैं जो क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि लाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने चुनाव के दौरान जनता से अपील करते हुए जोर देकर कहा था कि उन्हें मिलने वाला हर एक वोट केवल उनके व्यक्तिगत परिवार के लिए नहीं, बल्कि उन सभी अनगिनत परिवारों के लिए होगा जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के कारण अपनों को खोया है और इसका भारी नुकसान झेला है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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