महाराष्ट्र के मीरा रोड में बकरीद से पहले पूनम क्लस्टर सोसायटी में बकरों को लेकर हुए विवाद और सांप्रदायिक तनाव के बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत का कामाख्या मंदिर और कुर्बानी पर दिया गया बयान राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। राउत ने “नए हिंदुत्व” पर सवाल उठाते हुए बड़ा हमला बोला।

महाराष्ट्र में बकरीद से पहले उपजे सांप्रदायिक तनाव के बीच शिवसेना (UBT) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत का एक बयान राजनीतिक और धार्मिक बहस के केंद्र में आ गया है। मुंबई के पास मीरा रोड स्थित पूनम क्लस्टर हाउसिंग सोसायटी में बकरीद के लिए लाए गए बकरों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुका है। इसी विवाद के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने “कुर्बानी” और धार्मिक परंपराओं को लेकर कई तीखे सवाल उठाए, जिसने पूरे घटनाक्रम को और अधिक संवेदनशील बना दिया।

दरअसल, मीरा रोड की पूनम क्लस्टर हाउसिंग सोसायटी में कुछ निवासियों ने बकरीद के अवसर पर कुर्बानी के लिए रखे गए बकरों का विरोध किया था। इस दौरान दो पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। घटना ने धीरे-धीरे सांप्रदायिक तनाव का रूप ले लिया और इलाके में पुलिस बल तैनात करना पड़ा। विवाद के बढ़ने के बाद प्रशासन ने सोसायटी परिसर से बकरों को हटाकर निर्धारित स्थानों पर पहुंचाया।

इसी पृष्ठभूमि में बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने महाराष्ट्र में बकरीद को लेकर पैदा किए जा रहे तनाव पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा नहीं हैं। राउत ने आरोप लगाया कि कुछ समूह “नए हिंदुत्व” के नाम पर केवल मुस्लिम धार्मिक परंपराओं को निशाना बना रहे हैं, जबकि अन्य धर्मों में होने वाली पशु बलि पर चुप्पी साधी जाती है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय राउत ने कहा, “जो लोग कुर्बानी की बात कर रहे हैं, वे यह भी बताएं कि कामाख्या मंदिर में कितनी कुर्बानियां दी गईं?” उन्होंने दावा किया कि कामाख्या मंदिर में कथित तौर पर 55 भैंसों की बलि दी गई थी। राउत ने यह भी आरोप लगाया कि जो राजनीतिक दल और नेता आज मुस्लिम धार्मिक प्रथाओं का विरोध कर रहे हैं, वे पहले इसी तरह की धार्मिक रस्मों और अनुष्ठानों से जुड़े रहे हैं या उनसे राजनीतिक लाभ लेते रहे हैं।



अपने बयान में राउत ने महाराष्ट्र की ऐतिहासिक और सामाजिक परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ऐतिहासिक रूप से “नॉन-वेजिटेरियन स्टेट” रहा है और मराठा तथा क्षत्रिय परंपराओं में बलिदान और योद्धा संस्कृति का विशेष महत्व रहा है। राउत ने कहा, “बलिदान के बिना न तो देश सुरक्षित रह सकता है और न ही महाराष्ट्र।”

उन्होंने आगे कहा, “जो लोग बकरीद की कुर्बानी का विरोध कर रहे हैं, उन्हें कामाख्या मंदिर में कथित 55 भैंसों की बलि पर भी बोलना चाहिए। जिस सरकार ने ऐसी बलियों के बाद सत्ता हासिल की, वही अब दूसरों की धार्मिक परंपराओं पर सवाल उठा रही है।” कामाख्या मंदिर का जिक्र करते हुए राउत ने धार्मिक परंपराओं में कथित दोहरे मापदंडों का मुद्दा उठाने की कोशिश की। गौरतलब है कि असम स्थित कामाख्या मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और कुछ विशेष धार्मिक अवसरों पर वहां पशु बलि की परंपरा ऐतिहासिक रूप से जुड़ी रही है।

यह पहला मौका नहीं है जब संजय राउत ने कामाख्या मंदिर को महाराष्ट्र की राजनीति से जोड़ा हो। इससे पहले वर्ष 2025 में भी उन्होंने दावा किया था कि कामाख्या मंदिर में दी गई बलियों के भैंसों के सींग मुंबई स्थित मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास “वर्षा” में दफनाए गए थे, ताकि राजनीतिक शक्ति संतुलन को प्रभावित किया जा सके। उस समय भी उनके इस बयान पर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था।

संजय राउत के ताजा बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। बकरीद, धार्मिक परंपराओं, पशु बलि और सांप्रदायिक तनाव जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच दिया गया यह बयान अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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