ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को बंगाल में जीत की बधाई दी थी, जिस पर राउत ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता का सवाल उठाया।

भारतीय राजनीति के गलियारों में चल रही हलचल अब सात समंदर पार वाशिंगटन डीसी तक जा पहुँची है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत और उसके बाद राज्य में उपजे राजनीतिक संकट ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस घटनाक्रम में तब उबाल आया जब संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस 'ऐतिहासिक' जीत के लिए बधाई दी। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस हस्तक्षेप और बधाई संदेश पर शिवसेना (UBT) के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कड़ा ऐतराज जताया है। राउत ने सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के नाम एक पत्र लिखकर उन्हें भारतीय लोकतंत्र की आंतरिक मर्यादाओं और चुनाव प्रक्रिया की कथित विसंगतियों से अवगत कराया है।

विस्तृत विवरण के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व बहुमत हासिल किया है, जिसके बाद संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा हो गई। ममता बनर्जी द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद राज्यपाल ने अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए तृणमूल कांग्रेस की सरकार को भंग कर दिया। इसी बीच, व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन कर इस जीत को 'निर्णायक' और 'ऐतिहासिक' बताया। ट्रंप ने यहाँ तक कहा कि भारत भाग्यशाली है जिसे मोदी जैसा नेता मिला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले इस समर्थन ने विपक्षी दलों, विशेषकर शिवसेना (यूबीटी) को असहज कर दिया है।

संजय राउत ने अपने पत्र में अत्यंत तल्ख लहजे में लिखा कि भारत के एक संघीय ढांचे में राज्य स्तरीय चुनाव पूरी तरह से एक आंतरिक मामला है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि विदेशी राष्ट्र प्रमुख द्वारा ऐसे परिणामों पर समर्थन व्यक्त करना न केवल जल्दबाजी है, बल्कि अनुचित भी है। राउत ने पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि इन चुनावों के दौरान डर, धमकाने और व्यवस्थागत दबाव का माहौल बनाया गया था। उन्होंने केंद्रीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि संस्था का कामकाज सत्ताधारी दल के पक्ष में झुका हुआ प्रतीत हुआ।

संजय राउत ने पत्र में केंद्रीय सुरक्षा बलों की बड़े पैमाने पर तैनाती का भी जिक्र किया। उन्होंने तर्क दिया कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने मतदाताओं में विश्वास जगाने के बजाय जबरदस्ती का माहौल पैदा किया। ममता बनर्जी सहित कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए राउत ने ट्रंप से आग्रह किया कि वे इस मामले पर अधिक जानकारीपूर्ण और संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव कराना नहीं, बल्कि उनकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।

इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय राजनीति में विदेशी हस्तक्षेप की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। जहाँ एक तरफ भाजपा इसे वैश्विक स्तर पर भारत और प्रधानमंत्री मोदी के बढ़ते कद के रूप में देख रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के पतन और बाहरी दिखावे के तौर पर पेश कर रहा है। संजय राउत के इस पत्र ने स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल की चुनावी लड़ाई अब केवल कोलकाता या दिल्ली तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर एक वैचारिक युद्ध बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या व्हाइट हाउस इस पत्र पर कोई संज्ञान लेता है या यह विवाद केवल भारतीय राजनीति के पन्नों तक ही सीमित रहता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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