पटना: बिहार की सत्ता के गलियारों में पिछले कुछ हफ्तों से चल रही उठापटक अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के नए गठबंधन वाली सरकार आज विधानसभा के पटल पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी इस नई सरकार के लिए आज का दिन अग्निपरीक्षा जैसा है, जहां उन्हें विश्वास मत हासिल करना है। इस महत्वपूर्ण सत्र से ठीक पहले जेडीयू के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने एक संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से उन रहस्यों पर से पर्दा उठाया है, जो नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने और भाजपा को कमान सौंपने से जुड़े थे।

विजय चौधरी ने स्पष्ट किया कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि सहयोग और नैतिकता का भी मंच है। उन्होंने कहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव में जब जेडीयू की सीटें कम हुई थीं, तब भाजपा ने उदारता दिखाते हुए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में समर्थन दिया था। अब जब समय बदला और नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया, तो जेडीयू ने उसी "सहयोग के बदले सहयोग" की भावना के तहत मुख्यमंत्री का पद भाजपा को सौंपने का निर्णय लिया। यह कदम न केवल गठबंधन की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि बिहार में एक नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत का भी संकेत है। सत्ता का यह हस्तांतरण नीतीश कुमार के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के साथ हुआ है, जो यह सुनिश्चित करता है कि नई सरकार विकास के उन्हीं पदचिह्नों पर चलेगी जो पिछले दो दशकों में स्थापित किए गए हैं।

विधानसभा का यह एक दिवसीय सत्र विशेष रूप से फ्लोर टेस्ट के लिए बुलाया गया है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेताओं का दावा है कि उनके पास सदन में प्रचंड बहुमत है और विश्वास मत जीतना महज एक औपचारिकता है। हालांकि, विपक्ष की ओर से हमले थमे नहीं हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए नई सरकार पर तीखे प्रहार किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजग शासन की नीतियों के कारण बिहार का खजाना खाली हो रहा है और सम्राट चौधरी को एक ऐसी सरकार विरासत में मिली है जो पूरी तरह कर्ज के बोझ तले दबी हुई है। तेजस्वी ने भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन के मुद्दों को उठाकर नई सरकार की घेराबंदी करने की कोशिश की है।

इन आरोपों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने पुरानी यादें ताजा कीं। उन्होंने विपक्ष को याद दिलाया कि 2005 से पहले बिहार की वित्तीय स्थिति ऐसी थी कि सरकारी कर्मचारियों को वेतन देना भी एक बड़ी चुनौती बन गया था। उन्होंने तर्क दिया कि विकास कार्यों के लिए दुनिया की हर सरकार कर्ज लेती है और इसमें घबराने जैसी कोई बात नहीं है। चौधरी ने आरजेडी पर तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य की माली हालत पहले के मुकाबले कहीं अधिक सुदृढ़ है। इसके साथ ही, उन्होंने निशांत कुमार की आगामी बिहार यात्रा का स्वागत करते हुए इसे जेडीयू की मजबूती के तौर पर पेश किया।

बिहार की जनता इस समय कौतूहल और उम्मीद के बीच खड़ी है। एक तरफ सम्राट चौधरी के रूप में भाजपा का पहला मुख्यमंत्री राज्य की कमान संभाल रहा है, तो दूसरी तरफ नीतीश कुमार का अनुभव पर्दे के पीछे से सरकार को स्थिरता प्रदान कर रहा है। शराबबंदी जैसे संवेदनशील कानूनों की समीक्षा की उठती मांगों के बीच, सरकार ने फिलहाल खुद को इन बयानों से अलग रखा है। आज का विश्वास मत न केवल सम्राट चौधरी की स्वीकार्यता पर मुहर लगाएगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में राजग की नींव कितनी मजबूत है। राज्य के भविष्य और विकास की गति अब इसी नए नेतृत्व की कार्यक्षमता पर टिकी है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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