बिहार मंत्रिमंडल विस्तार- 12:10 का रहस्य! सम्राट चौधरी ने मंत्रिमंडल विस्तार के लिए क्यों चुना अभिजीत मुहूर्त?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचांग और राहुकाल को ध्यान में रखते हुए दोपहर 12:10 बजे शपथ ग्रहण समारोह का समय तय किया

पटना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल विस्तार से पहले धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुए।
पटना की राजनीतिक फिजा बुधवार को केवल सत्ता परिवर्तन की हलचल तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सनातन परंपरा, ज्योतिषीय गणना और राजनीतिक संदेश का अनोखा संगम भी दिखाई दिया। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार के लिए दोपहर 12 बजकर 10 मिनट का समय तय किया, जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों तक उत्सुकता पैदा कर दी। यह समय केवल प्रशासनिक सुविधा के आधार पर नहीं चुना गया, बल्कि पंचांग, ग्रह-नक्षत्र और शुभ मुहूर्त की गणना को ध्यान में रखकर तय किया गया था।
बिहार की राजधानी पटना में होने वाला यह मंत्रिमंडल विस्तार कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां इसे आगामी राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सनातन परंपराओं में आस्था भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। मुख्यमंत्री पहले भी अपने महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों और कार्यक्रमों के लिए शुभ मुहूर्त को प्राथमिकता देते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने ज्योतिषीय सलाह और पंचांग के अनुसार शपथ ग्रहण समारोह का समय निर्धारित किया।
7 मई 2026 के पंचांग के अनुसार दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक ‘अभिजीत मुहूर्त’ प्रभावी माना गया है। शास्त्रों में इसे ‘विजय मुहूर्त’ कहा जाता है, जिसे सत्ता, प्रशासन और बड़े निर्णयों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस मुहूर्त में शुरू किए गए कार्यों में स्थायित्व और सफलता प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसी अवधि के भीतर 12 बजकर 10 मिनट का समय चुना, ताकि शपथ ग्रहण प्रक्रिया शुभ कालखंड में संपन्न हो सके।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी आज का दिन सत्ता पक्ष के लिए अनुकूल माना जा रहा है। ग्रहों की वर्तमान स्थिति के अनुसार चंद्रमा धनु राशि में स्थित है, जबकि सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में विराजमान है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक यह योग राजनीतिक स्थिरता, आत्मविश्वास और प्रशासनिक मजबूती का संकेत देता है। सत्ता पक्ष के लिए इसे सकारात्मक ऊर्जा और राजनीतिक लाभ का सूचक माना जा रहा है।
इस समय चयन के पीछे एक और अहम कारण राहुकाल से बचना बताया जा रहा है। बुधवार को दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक राहुकाल प्रभावी रहेगा। सनातन परंपरा में राहुकाल को किसी भी शुभ या सरकारी कार्य के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। यही वजह है कि सरकार ने शपथ ग्रहण की पूरी प्रक्रिया राहुकाल शुरू होने से पहले समाप्त करने की रणनीति बनाई है। राजनीतिक कार्यक्रमों में इस तरह की ज्योतिषीय सावधानी भारतीय राजनीति में नई नहीं है, लेकिन बिहार में इस बार इसे विशेष रूप से महत्व दिया जा रहा है।
पटना में समारोह को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां भी व्यापक स्तर पर की गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है। गांधी मैदान में विशेष हेलीकॉप्टर लैंडिंग की व्यवस्था की गई है, जबकि एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के अनुसार उनका विमान सुबह करीब 11 बजकर 15 मिनट पर पटना एयरपोर्ट पहुंचेगा। इसके बाद वे हेलीकॉप्टर के जरिए गांधी मैदान पहुंचेंगे, जहां दोपहर 11 बजकर 55 मिनट तक उनके पहुंचने की संभावना है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राज्यपाल ठीक 12 बजकर 10 मिनट पर मंत्रियों को शपथ दिलाना शुरू करेंगे। समारोह पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री के दोपहर करीब 2 बजे दिल्ली लौटने का कार्यक्रम निर्धारित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में आगामी रणनीतिक संकेत भी है। लोकसभा चुनावों के बाद राज्य की राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच यह विस्तार सत्ता पक्ष के लिए संगठनात्मक संतुलन और राजनीतिक संदेश दोनों का माध्यम बन सकता है। हालांकि सरकार की ओर से इसे विकास और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है।
समारोह को लेकर आम जनता में भी खास उत्सुकता देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर ‘अभिजीत मुहूर्त’, ‘राहुकाल’ और ‘12:10 शपथ’ जैसे विषय चर्चा में बने हुए हैं। बिहार की राजनीति में धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं की भूमिका को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय राजनीति में परंपरा और सत्ता का संबंध आज भी गहराई से जुड़ा हुआ है। बिहार मंत्रिमंडल विस्तार का यह कार्यक्रम केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सत्ता रणनीति के संगम का प्रतीक बन गया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस नए मंत्रिमंडल का बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर आने वाले समय में क्या प्रभाव पड़ता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
