विरासत की मशाल और नेतृत्व का नया सूरज: जानिए कौन हैं सम्राट चौधरी, जिनके परिवार की रगों में दौड़ती है राजनीति!
सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी और मां पार्वती देवी भी राजनीति के दिग्गज चेहरे रहे हैं, अब बेटा संभालेगा बिहार की कमान।

बिहार के प्रस्तावित मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान, जिन्होंने अब राज्य की कमान संभालने की तैयारी पूरी कर ली है।
बिहार की सियासी बिसात पर एक बड़ा और निर्णायक उलटफेर देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में अपनी मजबूत स्थिति को रेखांकित करते हुए सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह केवल एक पद की प्राप्ति नहीं है, बल्कि उस राजनीतिक विरासत का चरमोत्कर्ष है जिसे उनके परिवार ने दशकों तक अपने संघर्ष और प्रभाव से सींचा है। मंगलवार को पटना में आयोजित एनडीए विधायक दल की बैठक में जब नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा, तो उसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। यह घटनाक्रम बिहार में भाजपा के बढ़ते वर्चस्व और भविष्य की राजनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सम्राट चौधरी का राजनीति से नाता कोई संयोग नहीं है, बल्कि उनकी जड़ें बिहार की मिट्टी में बहुत गहरी हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के एक ऐसे स्तंभ रहे हैं, जिनकी धमक आज भी मुंगेर और खगड़िया के क्षेत्रों में महसूस की जाती है। शकुनी चौधरी सात बार विधायक और पूर्व सांसद रह चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर निर्दलीय चुनाव जीतने से शुरू हुआ और वे राजद, समता पार्टी, कांग्रेस और जेडीयू जैसे विभिन्न दलों में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे। मुंगेर के तारापुर क्षेत्र में शकुनी चौधरी का जो जनाधार था, सम्राट चौधरी ने उसी विरासत को आधुनिक राजनीति के दौर में आगे बढ़ाया है। उनके पिता ने भले ही साल 2015 में सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया हो, लेकिन उनका मार्गदर्शन आज भी सम्राट चौधरी की राजनीतिक कार्यशैली में स्पष्ट झलकता है।
सफलता की इस कहानी में सम्राट चौधरी की मां, स्वर्गीय पार्वती देवी का भी अमूल्य योगदान रहा है। वे केवल एक गृहिणी नहीं, बल्कि एक सक्रिय राजनीतिज्ञ थीं। पार्वती देवी ने 1998 के उपचुनाव में समता पार्टी के टिकट पर तारापुर विधानसभा सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उनके निधन के समय पूरा मुंगेर क्षेत्र शोकाकुल था, क्योंकि उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। एक ऐसा परिवार जहां माता और पिता दोनों ही सदन का हिस्सा रहे हों, वहां सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचना उनके पारिवारिक संस्कारों और राजनीतिक प्रशिक्षण की स्वाभाविक परिणति मानी जा रही है।
व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो सम्राट चौधरी ने अपनी पारिवारिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों के बीच एक संतुलित तालमेल बनाए रखा है। साल 2007 में उनका विवाह ममता कुमारी से हुआ, जो उनके संघर्षों में उनकी ताकत बनी रहीं। उनके दो बच्चे, पुत्र प्रणय चौधरी और पुत्री चारू प्रिया, फिलहाल अपनी शिक्षा में व्यस्त हैं। सम्राट चौधरी अक्सर अपने सार्वजनिक भाषणों में परिवार की भूमिका और संस्कारों की चर्चा करते हैं, जो उन्हें जमीन से जोड़कर रखते हैं। तारापुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए अपने चहेते विधायक का मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना एक गौरवपूर्ण क्षण है।
प्रशासनिक और संवैधानिक पहलुओं की बात करें तो राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। 15 अप्रैल को होने वाला यह समारोह बिहार की सत्ता संरचना में एक बड़ा बदलाव लाएगा। कानूनी तौर पर यह सत्ता हस्तांतरण भारतीय संविधान की मर्यादाओं के भीतर हो रहा है, जहां बहुमत दल के नेता के रूप में सम्राट चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। आने वाले समय में उनके सामने न केवल सुशासन की चुनौती होगी, बल्कि भाजपा के सांगठनिक ढांचे को मुख्यमंत्री के रूप में नई ऊंचाई प्रदान करने का दायित्व भी होगा।
बिहार के सियासी इतिहास में सम्राट चौधरी का उत्थान एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है जिसने विरासत को बोझ नहीं बल्कि शक्ति बनाया। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल कैसा रहेगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन उनके परिवार के त्याग और समर्पण की कहानी इस नए सफर का सबसे मजबूत आधार है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
