बुकर पुरस्कार से सम्मानित और प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी ने भारत में चल रहे युवाओं के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है। न्यूयॉर्क में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान सलमान रुश्दी और न्यूयॉर्क के पहले भारतवंशी मेयर जोहरान ममदानी की मां व मशहूर फिल्मकार मीरा नायर ने भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता जताई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरी घटना दिवाली से ठीक पहले न्यूयॉर्क के पैसरीन रेस्टोरेंट में एशियन अमेरिकन राइटर्स वर्कशॉप (AAWW) के लिए आयोजित एक फंडरेजिंग डिनर के दौरान हुई, जिसकी मेजबानी खुद मीरा नायर कर रही थीं। इस डिनर के दौरान रुश्दी और नायर दोनों ने भारत के मौजूदा घटनाक्रमों और युवा प्रदर्शनकारियों पर अपनी बेबाक राय रखी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं|

डिनर में अपने संबोधन के दौरान सलमान रुश्दी ने भारत के कॉकरोच आंदोलन का विशेष उल्लेख किया और युवा प्रदर्शनकारियों के साहस की जमकर तारीफ की। रुश्दी ने कहा कि भारत में इस समय बहुत कुछ चल रहा है और सच कहें तो "भारत उबल रहा है"। उन्होंने कहा कि यदि वे इस मंच से कॉकरोच का जश्न मनाने की बात न कहें, तो यह गलत होगा, भले ही किसी रेस्टोरेंट के माहौल में ऐसा कहना थोड़ा अजीब लगे। उन्होंने आगे कहा कि भारत के युवाओं ने एक लंबे अरसे के बाद एक ऐसा अवसर दिया है, जिसने उम्मीद की नई किरण जगाई है। रुश्दी के अनुसार, लोगों का सड़कों पर उतरना और अपनी आवाज उठाना बेहद जरूरी है, क्योंकि वे उन विकल्पों को चुन रहे हैं जिन्हें करोड़ों भारतीय चाहकर भी नहीं चुन पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष में लगी चोटें भर जाएंगी, सूजन कम हो जाएगी और टूटी हड्डियां भी जुड़ जाएंगी, लेकिन कोई भी देश इस मौजूदा स्थिति के साथ आगे नहीं बढ़ सकता। इस दौरान उन्होंने मुंबई में बिताए अपने बचपन और वहां मनाई जाने वाली दिवाली की यादों को भी साझा किया।

कार्यक्रम की मेजबान और जाने-माने मेयर जोहरान ममदानी की मां मीरा नायर ने भी सलमान रुश्दी के बयानों का पूरा समर्थन किया। नायर ने भारत में युवाओं द्वारा चलाए जा रहे इस आंदोलन पर गहरा गर्व व्यक्त किया और खुद को 'कॉकरोच मॉम' कहकर संबोधित किया। हालांकि, सलमान रुश्दी और मीरा नायर की इन टिप्पणियों का सोशल मीडिया पर कड़ा विरोध शुरू हो गया है और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।

सोशल मीडिया पर कई हस्तियों और उपयोगकर्ताओं ने रुश्दी के बयान पर सवाल खड़े किए हैं। रूपा सुब्रमन्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि रुश्दी का यह रुख बेहद अजीब है, क्योंकि वे खुद एक किताब लिखने की वजह से दशकों तक कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे और फतवों का सामना करते रहे, यहाँ तक कि 2022 में उन पर जानलेवा हमला भी हुआ। उन्होंने टिप्पणी की कि भारतीय प्रगतिशील कभी भी कट्टरपंथ के खिलाफ रुश्दी का साथ नहीं देंगे। वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि जिस व्यक्ति ने कट्टरपंथियों के हमले में अपनी एक आंख गंवा दी और जिंदगी भर डर के साए में जिया, उसके लिए ऐसे मुद्दों पर बयान देना बहुत आसान लगता है।


Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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