जाति जनगणना पर संघ का रुख: समर्थन और सावधानी

देश में जारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने जाति जनगणना (Caste Census) को लेकर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। संघ ने कहा है कि वह जाति जनगणना के विरोध में नहीं है, बशर्ते इसका उपयोग समाज के कल्याण और विकास के लिए किया जाए। हालांकि, संगठन ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि इसे समाज को खंडित करने या चुनावी लाभ के लिए राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति किसी को नहीं दी जानी चाहिए।

कल्याणकारी नीतियों के लिए डेटा ज़रूरी

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने नई दिल्ली में संगठन के दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को विभिन्न समुदायों की स्थिति समझने और उनके उत्थान के लिए योजनाएं बनाने हेतु सटीक डेटा की आवश्यकता हो सकती है। इस अर्थ में, जाति जनगणना एक उपयोगी प्रशासनिक कदम साबित हो सकती है। लेकिन, संघ का प्राथमिक सरोकार यह है कि यह प्रक्रिया समुदायों के बीच 'टकराव' के बजाय 'समन्वय' का आधार बने।

सामाजिक समरसता: मुख्य एजेंडा

सुनील आंबेकर ने जोर देकर कहा कि आरएसएस जाति के मुद्दे को सामाजिक समरसता (Social Harmony) के चश्मे से देखता है। उन्होंने कहा, "यदि समाज में आपसी प्रेम और विश्वास बढ़ेगा, तो बड़ी से बड़ी समस्याएं स्वतः सुलझ जाएंगी। इसके विपरीत, यदि समरसता का अभाव है, तो छोटे-छोटे मतभेद भी बड़े विवादों का रूप ले लेते हैं।"

संघ का लक्ष्य एक ऐसा समाज बनाना है जहाँ:

  • सार्वजनिक स्थलों पर समानता: मंदिरों, श्मशान घाटों, जल स्रोतों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर समाज के हर वर्ग का बिना किसी भेदभाव के प्रवेश सुनिश्चित हो।
  • स्वयंसेवकों की भूमिका: आरएसएस के स्वयंसेवक जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं ताकि छुआछूत जैसी कुरीतियों को खत्म किया जा सके और समुदायों के बीच की खाई को पाटा जा सके।
  • सेवा नेटवर्क: विद्या भारती, सेवा भारती, वनवासी कल्याण आश्रम और एकल विद्यालय जैसे संगठन इस व्यापक जनसंपर्क नेटवर्क के जरिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहे हैं।


महिलाओं की भागीदारी और संगठन का ढांचा

संगठन में महिलाओं की भूमिका को लेकर भी सुनील आंबेकर ने महत्वपूर्ण चर्चा की। उन्होंने 'राष्ट्रीय सेविका समिति' की कार्यप्रणाली का बचाव किया, जो आरएसएस की शाखा पद्धति के समांतर ही महिलाओं के बीच राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रही है। आंबेकर ने स्वीकार किया कि बदलते समय के साथ निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और जनसंपर्क अभियानों में महिलाओं की भागीदारी को और अधिक विस्तार देने की आवश्यकता है।

उन्होंने 'महिला समन्वय' नामक तंत्र का उल्लेख किया, जो वर्तमान में संघ के विभिन्न अनुषांगिक संगठनों और समाज के बीच महिलाओं की सक्रियता और नेतृत्व को बढ़ावा देने का काम कर रहा है।

राष्ट्र निर्माण और दीर्घकालिक लक्ष्य

आरएसएस का मानना है कि जाति जनगणना जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर विचार करना चाहिए। संघ का जोर इस बात पर है कि किसी भी डेटा या नीति का अंतिम उद्देश्य राष्ट्र की एकता को मजबूत करना होना चाहिए। संगठन का स्पष्ट मत है कि जातिगत पहचान का उपयोग भेदभाव मिटाने के लिए होना चाहिए, न कि नई दीवारें खड़ी करने के लिए।


संघ के इस बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह विकास और सुधार के प्रति लचीला रुख रखता है, लेकिन राष्ट्र की अखंडता और सामाजिक एकता के साथ समझौता करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है। आगामी समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि संघ का यह 'संतुलित दृष्टिकोण' देश की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर क्या प्रभाव डालता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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