देश के टुकड़े करने वाली ये सियासत कब थमेगी? रेवंत रेड्डी के 'उत्तर-दक्षिण' वाले वार पर किरेन रिजिजू का महा-पलटवार!
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा केंद्र पर दक्षिण भारत से भेदभाव के आरोपों को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए खारिज किया।

बाईं ओर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और दाईं ओर तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी|
भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय अस्मिता और राष्ट्रीय अखंडता को लेकर एक बार फिर बड़ा वैचारिक टकराव सामने आया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा उत्तर और दक्षिण भारत के बीच कथित भेदभाव को लेकर दिए गए एक बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। नई दिल्ली में आधिकारिक सूत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आए इस विवाद ने देश के राजनीतिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार पर दक्षिण भारतीय राज्यों की उपेक्षा करने और केवल उत्तर भारत को प्राथमिकता देने का गंभीर आरोप लगाया था। इस पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को भौगोलिक आधार पर विभाजित करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि संवैधानिक और सामाजिक रूप से सभी भारतीय एक हैं।
इस पूरे विवाद की शुरुआत बेंगलुरु में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम से हुई, जहाँ मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दावा किया कि देश के शीर्ष नीति-निर्धारक पदों पर दक्षिण भारत को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने अपने तर्क में कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों ही उत्तर भारत से संबंध रखते हैं, जिससे दक्षिण के राज्यों में यह भावना बलवती हो रही है कि उनके साथ न्याय नहीं हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कर राजस्व का मुद्दा भी उठाया। रेड्डी के अनुसार, दक्षिण भारतीय राज्य देश के विकास के लिए टैक्स का एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार के खजाने में योगदान करते हैं, लेकिन वित्तीय आवंटन के समय उन्हें उनके आनुपातिक अधिकार और अपेक्षित लाभ नहीं दिए जाते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि दक्षिण भारत के नागरिक देश में किसी भी कीमत पर दूसरे दर्जे के नागरिक बनकर रहने को तैयार नहीं हैं।
मुख्यमंत्री के इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तथ्यात्मक विवरण साझा किया। रिजिजू ने देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे गणमान्य व्यक्तियों की क्षेत्रीय पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए लिखा कि वर्तमान राष्ट्रपति पूर्वी भारत के ओडिशा राज्य से आने वाली एक आदिवासी महिला हैं, प्रधानमंत्री पश्चिम भारत के गुजरात राज्य से संबंध रखते हैं और उपराष्ट्रपति का संबंध दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु से है। उन्होंने तार्किक रूप से सिद्ध किया कि यह आरोप पूरी तरह निराधार है कि देश की सत्ता और शीर्ष पदों पर केवल उत्तर भारत का नियंत्रण है। उन्होंने विपक्ष के इस दृष्टिकोण को देश की एकता के ताने-बाने को कमजोर करने वाली राजनीति करार दिया।
इस राजनीतिक गतिरोध के पीछे एक गहरा प्रशासनिक और जनसांख्यिकीय कारण भी छिपा हुआ है, जो भविष्य में होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है। दक्षिणी राज्यों के क्षेत्रीय दल और नेता लंबे समय से यह चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि यदि आगामी वर्षों में जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाता है, तो दक्षिण भारतीय राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व घट जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया है। रेवंत रेड्डी का यह ताजा बयान इसी राजनीतिक और प्रशासनिक आशंका की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जिसने केंद्र और राज्यों के बीच के संघीय ढांचे पर सवाल खड़े किए हैं।
उत्तर-दक्षिण के इस क्षेत्रीय विवाद के अलावा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी अपनी सरकार की एक महत्वाकांक्षी प्रशासनिक एजेंसी को लेकर भी चौतरफा विवादों से घिर गए हैं। बेंगलुरु के उसी कार्यक्रम में उन्होंने तेलंगाना की अतिक्रमण विरोधी संस्था, हैदराबाद डिजास्टर रिस्पॉन्स एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी (HYDRAA) की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए एक विवादित संदर्भ दे दिया। उन्होंने खुले मंच से दावा किया कि इस विशेष सुरक्षा एजेंसी के नाम और इसकी कार्यशैली की मुख्य अवधारणा के लिए उन्होंने जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर से प्रेरणा प्राप्त की थी। रेड्डी ने कहा कि हाइड्रा शब्द हिटलर का अत्यंत पसंदीदा शब्द था और तानाशाह की सबसे भरोसेमंद कोर टीम का नाम भी यही था।
इस ऐतिहासिक संदर्भ के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी और भारत राष्ट्र समिति सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लिया। इतिहासकारों और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी रेवंत रेड्डी के इस दावे को पूरी तरह काल्पनिक बताया है, क्योंकि ऐसा कोई प्रामाणिक दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद नहीं है जो यह साबित करे कि हिटलर के किसी संगठन का नाम हाइड्रा था। इस हिटलर संबंधी टिप्पणी और उत्तर-दक्षिण के विभाजनकारी बयानों ने मिलकर तेलंगाना के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है, जिसने लोकतांत्रिक मर्यादाओं और ऐतिहासिक तथ्यों की सत्यता पर नए सवालिया निशान लगा दिए हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
