अयोध्या से उठी नई राजनीतिक आंधी! राम मंदिर चढ़ावे पर सवाल, विपक्ष का BJP पर सीधा निशाना
प्रियंका चतुर्वेदी और डिंपल यादव ने मंदिर प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल, न्यायिक जांच की मांग।

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर और इस मामले पर बात करतीं शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी|
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दानपात्र की राशि में कथित अनियमितताओं का मामला अब गहराता जा रहा है। मंदिर में चढ़ावे की राशि में गबन के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इस प्रकरण पर विपक्ष ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सरकार और मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर विपक्षी नेताओं ने अविश्वास व्यक्त करते हुए निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि भक्तों की आस्था और उनके द्वारा अर्पित धन के साथ खिलवाड़ अक्षम्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो राजनीतिक दल राम मंदिर निर्माण का पूरा श्रेय लेने का दावा करते हैं, उन्हीं के शासन में इस प्रकार का घोटाला सामने आना गंभीर प्रशासनिक चूक को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एसआईटी की जांच में उन तथ्यों का खुलासा होगा जो वर्तमान में पर्दे के पीछे हैं, जिससे मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के जवाब मिल सकेंगे।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने इस मामले में और भी गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि सरकार को इस घोटाले की जानकारी पहले से थी, लेकिन इसे साजिशन दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे किसी स्वतंत्र ज्यूरी या न्यायालय की देखरेख में सौंपा जाना चाहिए। डिंपल यादव ने यह भी प्रश्न उठाया कि मंदिर परिसर के अतिरिक्त अन्य विकास कार्यों और कॉरिडोर निर्माण में भूमि अधिग्रहण के दौरान हुई खरीद-फरोख्त की भी गहन जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण प्रक्रिया में कहीं कोई वित्तीय हेरफेर तो नहीं हुई है।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने इस मुद्दे को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जोड़ते हुए कहा कि यह मामला केवल राज्य के दायरे का नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि चूंकि राम मंदिर का निर्माण माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुरूप हुआ है, अतः इस घपलेबाजी की जांच भी सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों में गठित टीम द्वारा ही की जानी चाहिए। दूसरी ओर, सपा नेता अबू आजमी ने इस घटना को अत्यंत शर्मनाक करार देते हुए कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मंदिर प्रबंधन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्षी दलों के लगातार दबाव से मामला और भी संवेदनशील हो गया है। आगामी दिनों में एसआईटी की रिपोर्ट इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिस पर पूरे देश की नज़र टिकी है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
