नई दिल्ली:

सोमवार को देश के तीन प्रमुख राज्यों—बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 राज्यसभा सीटों के लिए हुए मतदान ने भारतीय राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। चुनाव के जो नतीजे सामने आए हैं, वे सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आए हैं, जबकि विपक्षी खेमे में फूट और अंतर्कलह की तस्वीरें साफ दिखाई दी हैं।

बिहार: एनडीए की 'क्लीन स्वीप' और महागठबंधन में दरार

बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए ने अपना दबदबा साबित करते हुए सभी सीटों पर जीत दर्ज की है।

  • विजेता उम्मीदवार: एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जदयू के रामनाथ ठाकुर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा ने शानदार जीत हासिल की।
  • विपक्ष की स्थिति: राजद और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को समर्थन देने के दावों के बावजूद, महागठबंधन के चार विधायक (कांग्रेस के तीन और आरजेडी का एक) वोटिंग से गायब रहे। तेजस्वी यादव ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि 'विश्वासघात' नहीं हुआ होता, तो जीत निश्चित थी।


ओडिशा: भाजपा और दिलीप राय का जलवा

ओडिशा की 4 सीटों के नतीजे भी काफी रोचक रहे। यहाँ भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 4 में से 3 सीटों पर कब्जा जमाया।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार ने अपनी सीटें बरकरार रखीं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने भाजपा समर्थित निर्दलीय के रूप में जीत हासिल कर सबको चौंका दिया। बीजेडी के आठ विधायकों द्वारा उनके पक्ष में क्रॉस-वोटिंग करने का दावा किया जा रहा है, जिससे नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी में खलबली मच गई है। बीजेडी के संत्रुप्ता मिश्रा भी एक सीट जीतने में सफल रहे।

हरियाणा: मतगणना पर ब्रेक और 'सीक्रेसी' का विवाद

हरियाणा की 2 सीटों पर चुनाव प्रक्रिया सोमवार रात तक विवादों में घिरी रही। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने एक-दूसरे पर 'वोट की गोपनीयता' (Secrecy) भंग करने का आरोप लगाया।

  • विवाद: भाजपा ने कांग्रेस विधायकों भरत सिंह बेनीवाल और परमवीर सिंह के वोट पर आपत्ति जताई, तो कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री अनिल विज के वोट को लेकर चुनाव अधिकारी से शिकायत की।
  • समीकरण: 90 सदस्यीय विधानसभा में 88 वोट पड़े। आईएनएलडी के अर्जुन और आदित्य चौटाला ने वोटिंग से दूरी बनाई। भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध के बीच मुकाबला कड़ा है, जबकि निर्दलीय सतीश नांदल क्रॉस-वोटिंग की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

निर्विरोध निर्वाचित हुए दिग्गज

आपको बता दें कि देशभर की कुल 37 सीटों के लिए प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिनमें से 26 सीटों पर परिणाम पहले ही आ चुके थे क्योंकि वहां कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं था। निर्विरोध चुने गए प्रमुख चेहरों में भाजपा के 7, कांग्रेस के 5, टीएमसी के 4 और डीएमके के 3 उम्मीदवार शामिल हैं। इनके अलावा शिवसेना, एनसीपी और आरपीआई के उम्मीदवारों ने भी बिना किसी मुकाबले के संसद में अपनी जगह पक्की कर ली है।

कांग्रेस अध्यक्ष का कड़ा रुख

हरियाणा में मतगणना में हो रही देरी को देखते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। खड़गे ने आरोप लगाया कि जानबूझकर वैध वोटों को अमान्य करने की कोशिश की जा रही है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।


राज्यसभा के इन चुनावों ने न केवल उच्च सदन के गणित को प्रभावित किया है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक ध्रुवीकरण का संकेत भी दे दिया है। बिहार और ओडिशा में एनडीए की मजबूती और हरियाणा में फंसा पेच यह बताता है कि आने वाले दिनों में कयामत की रात जैसी राजनीतिक खींचतान जारी रहेगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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