Rahul Gandhi attack on PM Modi 2026 : भारतीय राजनीति के केंद्र में इस समय 'आर्थिक देशभक्ति' और 'प्रशासनिक विफलता' को लेकर एक भीषण संग्राम छिड़ गया है। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और अमेरिका-ईरान युद्ध के वैश्विक प्रभावों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से किए गए 'त्याग' के आह्वान पर विपक्ष ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री पर सीधा प्रहार करते हुए उन्हें 'समझौतावादी प्रधानमंत्री' करार दिया। राहुल गांधी का यह हमला उस वक्त आया है जब केंद्र सरकार वैश्विक संकट के कारण बढ़ते व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को कम करने के लिए जनता से निजी आदतों में बदलाव की अपील कर रही है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक कड़े बयान में तर्क दिया कि प्रधानमंत्री द्वारा पेट्रोल-डीजल की कम खपत, सोने की खरीद टालने और विदेश यात्राओं से बचने की सलाह वास्तव में उनकी सरकार की 12 वर्षों की आर्थिक नीतियों की विफलता का आधिकारिक स्वीकारोक्ति है। गांधी ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि एक दशक से अधिक शासन करने के बाद देश को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया गया है, जहां सरकार को नागरिकों को यह निर्देश देना पड़ रहा है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और कहां जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी देश के सामने कोई गंभीर संकट आता है, प्रधानमंत्री अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करने के बजाय जिम्मेदारी का बोझ जनता के कंधों पर डाल देते हैं। राहुल के अनुसार, ये शब्द सुझाव नहीं बल्कि एक अक्षम शासन के प्रमाण हैं।

इस राजनीतिक घमासान की पृष्ठभूमि रविवार को प्रधानमंत्री द्वारा हैदराबाद की एक रैली में दिए गए उस संबोधन से तैयार हुई थी, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के चलते ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान का हवाला देते हुए देशवासियों से 'कोविड-युग' जैसे वर्क-फ्रॉम-होम और वर्चुअल मीटिंग्स को पुनः अपनाने का आग्रह किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि पेट्रोल और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण हर हाल में विदेशी मुद्रा बचाना राष्ट्रहित में अनिवार्य हो गया है। प्रधानमंत्री की इस 'आर्थिक देशभक्ति' की अपील को कांग्रेस ने "बेशर्म और अनैतिक" करार देते हुए कहा कि सरकार अपनी आकस्मिक योजनाओं (Contingency Plans) की कमी को छुपाने के लिए जनता को असुविधा में धकेल रही है।

वर्तमान परिदृश्य में यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की भविष्य की ऊर्जा नीति और आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। जहां सरकार का मानना है कि प्राकृतिक खेती, स्वदेशी उत्पादों और ईंधन की बचत के जरिए ही इस वैश्विक संकट से पार पाया जा सकता है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की कूटनीतिक और आर्थिक दूरदर्शिता की हार मान रहा है। यह टकराव स्पष्ट करता है कि आगामी दिनों में विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच घरेलू महंगाई का प्रबंधन भारत के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। इस घटनाक्रम ने यह भी संकेत दे दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मुद्दा आने वाले चुनावों में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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