दिवाली या किसी अन्य बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच नई दिल्ली में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नया सियासी समीकरण चर्चा का विषय बना हुआ है। बीते सोमवार को जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला, तो उसमें एक और खास चेहरा नजर आया। यह चेहरा 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा का था, जो हाल ही में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के जुलाई के विरोध प्रदर्शन का भी एक जाना-माना चेहरा रही हैं। इस मार्च के दौरान राहुल गांधी ने नेहा बोरा को प्रियंका गांधी के साथ एकदम फ्रंट लाइन में जगह दी।

प्रोटेस्ट के दौरान कई मौकों पर राहुल गांधी को 29 वर्षीय नेहा बोरा और अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के कंधों पर हाथ रखते हुए देखा गया। जहां कांग्रेस पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के पीछे चल रहे थे, वहीं ये दोनों महिलाएं उनके साथ-साथ कदमताल करती नजर आईं। राहुल गांधी द्वारा नेहा बोरा को इस तरह से अहमियत दिए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कांग्रेस पार्टी किसी सोची-समझी रणनीति के तहत काम कर रही है। दरअसल, हाल के दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को जिस तरह से 'जेन-जी' (Gen-Z) का भारी समर्थन मिल रहा था, उससे राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति कांग्रेस पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकती है। इतिहास गवाह है कि कैसे 2012 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के मूवमेंट ने कांग्रेस पार्टी के सियासी वजूद को बड़ा झटका दिया था, ऐसे में कांग्रेस किसी भी नए या उभरते हुए राजनीतिक विकल्प को लेकर सतर्क रुख अपना सकती है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक गुप्त रणनीति क्या है, इस पर अभी कुछ भी स्पष्ट रूप से कहना जल्दबाजी होगी।

कौन हैं नेहा बोरा?

नेहा बोरा वामपंथी छात्र संगठन 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और मौजूदा समय में भारत के 'जेन-जी' छात्र आंदोलनों के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरी हैं। उन्हें हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनों में भी काफी दमदार तरीके से प्रदर्शन करते हुए देखा गया था। जून 2026 में नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन के दौरान उन्होंने 23 दिनों तक लंबी भूख हड़ताल की थी, जिसके बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर भारी सुर्खियों में आई थीं।

इसके अलावा, झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जब वह रांची में प्रदर्शन कर रही थीं, तब उनके चेहरे पर स्याही फेंकी गई थी। उस घटना के बाद उनका यह बयान काफी चर्चा में रहा था कि इस तरह की हरकतों से छात्रों और युवाओं का गुस्सा दबने वाला नहीं है। इसके साथ ही, हाल ही में अक्टूबर 2026 में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान वह फ्रंट लाइन पर नजर आईं। इस दौरान पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ने के प्रयास के कारण उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में भी लिया गया था।

कॉकरोच जनता पार्टी की नई रणनीति

दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी अपने समर्थकों का दायरा बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर सहारा ले रही है। इसके साथ ही, पार्टी कई जाने-माने एक्टिविस्ट्स, राजनीतिक दलों और युवा छात्र संगठनों से संपर्क साधकर उनका खुला समर्थन मांग रही है। पार्टी के प्रमुख चेहरे जैसे अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं और देश की मुख्यधारा की सियासत में खुद को सक्रिय बनाए हुए हैं। बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम में राहुल गांधी के साथ नेहा बोरा की यह मौजूदगी आने वाले समय में नए सियासी समीकरणों को जन्म दे सकती है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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