राहुल गांधी का पीएम मोदी पर बड़ा आरोप: अमेरिका के साथ ₹500 बिलियन का व्यापार समझौता अडाणी को रिश्वत मामले में बचाने के लिए किया गया। राजनीति में भारी हड़कंप।

Rahul Gandhi Adani US bribery scandal claims : भारतीय राजनीति के गलियारों में एक बार फिर अडानी समूह को लेकर घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया है कि फरवरी 2026 में अमेरिका के साथ हुआ ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreement) कोई व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि उद्योगपति गौतम अडानी को अमेरिकी जांच एजेंसियों के चंगुल से छुड़ाने की एक 'गुप्त डील' थी। राहुल गांधी का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अडानी को $265 मिलियन के रिश्वत कांड और धोखाधड़ी के मामलों में राहत दिलाने के लिए भारत के आर्थिक हितों की बलि चढ़ा दी है।

यह विवाद उस समय गहरा गया है जब 'ब्लूमबर्ग' और 'न्यूयॉर्क टाइम्स' जैसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि अमेरिकी न्याय विभाग (US Justice Department) गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को जल्द ही बंद कर सकता है। वहीं, अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने $18 मिलियन के नागरिक निपटान (Civil Settlement) का प्रस्ताव रखा है, जिसमें अडानी को अपना दोष स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं होगी। राहुल गांधी ने इन कड़ियों को जोड़ते हुए संसद में गर्जना की कि भारत-यूएस ट्रेड फ्रेमवर्क, जिसके तहत शुल्कों में कटौती और $500 बिलियन की अमेरिकी खरीदारी का संकल्प लिया गया है, दरअसल अडानी को कानूनी 'सेफ पैसेज' दिलाने की कीमत है।

कानूनी दस्तावेजों और हालिया घटनाक्रमों पर नजर डालें तो अडानी समूह पर भारतीय सौर अनुबंधों (Solar Contracts) को हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करोड़ों डॉलर की रिश्वत देने का आरोप था। राहुल गांधी का तर्क है कि अमेरिका के साथ इस 'होलसेल सरेंडर' वाले समझौते ने भारत की ऊर्जा और डेटा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, जिसका लाभ केवल एक उद्योगपति को मिल रहा है। हालांकि, सत्तारूढ़ भाजपा और सरकारी सूत्रों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और 'काल्पनिक' करार दिया है। उनका कहना है कि यह ट्रेड डील भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए की गई है और इसका किसी निजी कानूनी मामले से कोई संबंध नहीं है।

इस पूरे प्रकरण ने न केवल भारतीय संसद बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। जहां एक तरफ विपक्ष जेपीसी (JPC) जांच और पूर्ण प्रकटीकरण की मांग पर अड़ा है, वहीं दूसरी तरफ अडानी समूह का कहना है कि वे सभी कानूनों का पालन करने वाली संस्था हैं। यह मामला अब केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं रह गया है, बल्कि यह पारदर्शिता, राष्ट्रीय सुरक्षा और कॉर्पोरेट जवाबदेही की एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी के इन आरोपों से भारत-अमेरिका संबंधों और घरेलू राजनीति की दिशा में कोई बड़ा बदलाव आता है या नहीं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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