महिला आरक्षण बिल पर राहुल गांधी का बयान ; क्यों वायरल हो रही है 'वाइफ इश्यू' वाली ये टिप्पणी?
महिला आरक्षण बिल पर संसद में बहस के दौरान राहुल गांधी की ‘वाइफ इश्यू’ टिप्पणी ने चर्चा का नया आयाम जोड़ दिया। महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, जबकि उनकी हल्की टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी।
महिला आरक्षण विधेयक पर संसद में चल रही गंभीर बहस के बीच उस समय माहौल हल्का हो गया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक टिप्पणी करते हुए सदन में हंसी का माहौल पैदा कर दिया। हालांकि यह टिप्पणी हल्के अंदाज में की गई थी, लेकिन इसके बाद यह राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा का प्रमुख विषय बन गई।
दरअसल, राहुल गांधी अपने संबोधन के दौरान महिलाओं की भूमिका और उनके समाज पर प्रभाव को रेखांकित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महिलाएं हमारे राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आकार देने में एक केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हम सभी अपने जीवन में अपनी माताओं, बहनों और पत्नियों से प्रभावित होते हैं और उनसे निर्णय लेने की समझ विकसित करते हैं।
इसी क्रम में, उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की एक टिप्पणी का संदर्भ लेते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “जैसा कि रिजिजू जी ने कहा… प्रधानमंत्री और मैं इस ‘वाइफ इश्यू’ से नहीं जूझते, इसलिए हमें वह इनपुट नहीं मिलता, लेकिन हमारे पास हमारी माताएं और बहनें हैं।” यह टिप्पणी सुनते ही सदन में हंसी गूंज उठी और कुछ समय के लिए माहौल हल्का हो गया।
#WATCH | "Prime Minister and myself don’t have that wife issue...," says LoP, Lok Sabha, Rahul Gandhi on a light-hearted note during the special session of Parliament on women's reservation and delimitation. pic.twitter.com/ZVdPvRalFz
— ANI (@ANI) April 17, 2026
हालांकि यह बयान एक गंभीर चर्चा के बीच आया था, लेकिन इसकी वायरल क्लिप्स ने इसे व्यापक चर्चा का विषय बना दिया। कई जगह इस टिप्पणी को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया, जिससे इसके वास्तविक आशय को लेकर भ्रम की स्थिति भी बनी।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने जहां महिलाओं के प्रभाव और उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया, वहीं उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार की मंशा पर भी तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “यह महिलाओं का बिल नहीं है। इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और यह देश के चुनावी नक्शे को बदलने का प्रयास है, जिसमें महिलाओं को एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि महिला आरक्षण विधेयक, जिसे आधिकारिक रूप से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2023)’ कहा जाता है, लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए उप-आरक्षण भी शामिल है।
संसद में हुई यह बहस जहां एक ओर महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को केंद्र में लाती है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दृष्टिकोण और नीतिगत मंशाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। राहुल गांधी की टिप्पणी ने इस चर्चा को और अधिक ध्यानाकर्षक बना दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मुद्दा केवल विधायी नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक महत्व भी रखता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
