बिहार की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का केंद्र रहा पटना का 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला अब एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने आखिरकार इस सरकारी आवास को खाली करना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार के साथ कई महीनों से चल रहे विवाद और अंतिम समय सीमा समाप्त होने के बाद सोमवार, 29 जून से बंगले से सामान हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसके साथ ही बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित सरकारी आवासों में से एक पर चला आ रहा लंबा गतिरोध भी समाप्ति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

सोमवार सुबह से ही बंगले के बाहर हलचल तेज रही। अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में बंगले से सीसीटीवी कैमरे हटाए गए, फर्नीचर और घरेलू सामान को पैक कर ट्रकों में लादा गया। यह पूरी प्रक्रिया इस बात का संकेत है कि राबड़ी देवी का परिवार अब आधिकारिक रूप से इस सरकारी आवास का कब्जा प्रशासन को सौंपने की तैयारी में है। पिछले कई महीनों से इस बंगले को लेकर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ था।

दरअसल, विवाद उस समय शुरू हुआ जब बिहार सरकार ने पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड के सरकारी बंगले का पुनः आवंटन राज्य के मंत्री नंद किशोर राम के नाम कर दिया। सरकार का कहना था कि राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते पहले ही 39 हार्डिंग रोड स्थित एक अन्य सरकारी आवास आवंटित किया जा चुका है। सरकारी आवास नियमों के अनुसार एक व्यक्ति एक समय में केवल एक ही सरकारी आवास रख सकता है, इसलिए उन्हें 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करना आवश्यक था।

इसी आधार पर भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को कई बार नोटिस जारी किए। कई महीनों तक चले पत्राचार और नोटिसों के बाद विभाग ने अंतिम नोटिस जारी करते हुए उन्हें सात दिनों के भीतर, यानी 29 जून तक बंगला खाली करने का निर्देश दिया था। साथ ही स्पष्ट चेतावनी भी दी गई थी कि निर्धारित समय सीमा तक आवास खाली नहीं करने की स्थिति में उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि शुरुआत में राबड़ी देवी ने इस आदेश का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह स्वेच्छा से यह सरकारी आवास खाली नहीं करेंगी और यदि सरकार बंगला वापस लेना चाहती है तो उन्हें बलपूर्वक हटाना होगा। उनके इस बयान ने पूरे मामले को राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील बना दिया था तथा बिहार की सियासत में इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ गई थी।

बंगला खाली करने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले राबड़ी देवी ने भवन निर्माण विभाग को एक पत्र भी लिखा था। उन्होंने विभाग से बंगले में मौजूद सरकारी सामान की विस्तृत सूची उपलब्ध कराने और सभी सरकारी संपत्तियों का सत्यापन कराने की मांग की थी, ताकि आवास का कब्जा सौंपते समय भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या भ्रम उत्पन्न न हो।

सरकार ने राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित किया है, लेकिन विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार संभावना जताई जा रही है कि लालू प्रसाद यादव का परिवार फिलहाल सीधे वहां शिफ्ट होने के बजाय कुछ समय के लिए तेजस्वी यादव के आवास पर रह सकता है। हालांकि परिवार की ओर से स्थायी रूप से किस स्थान पर रहने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

पटना का 10 सर्कुलर रोड बंगला केवल एक सरकारी आवास नहीं रहा, बल्कि पिछले लगभग दो दशकों से यह लालू प्रसाद यादव परिवार और राष्ट्रीय जनता दल की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी रहा है। यहीं से पार्टी की कई महत्वपूर्ण बैठकों, रणनीतिक चर्चाओं और राजनीतिक फैसलों को दिशा मिली। इसी कारण इस बंगले को खाली कराने का सरकारी निर्णय केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका व्यापक राजनीतिक महत्व भी रहा है।

अब जबकि राबड़ी देवी ने अंतिम सरकारी समय सीमा के भीतर बंगला खाली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, प्रशासन जल्द ही इस आवास का आधिकारिक कब्जा अपने हाथ में लेगा। इसके बाद नियमानुसार यह सरकारी बंगला नए आवंटी को सौंप दिया जाएगा। लगभग दो दशक तक बिहार की राजनीति का अहम केंद्र रहे इस आवास से राबड़ी देवी और लालू परिवार की विदाई राज्य की राजनीतिक स्मृतियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में दर्ज की जाएगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story