ऐतिहासिक फैसला: गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता के लिए बना सबसे सख्त कानून, क्या खत्म होगा बेअदबी का काला दौर?
राज्यपाल की मंजूरी के साथ पंजाब बेअदबी विरोधी विधेयक अब कानून बना, दोषियों को उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा चंडीगढ़ में बेअदबी विरोधी कानून पर राज्यपाल की मंजूरी के बाद विपक्ष पर निशाना साधते हुए।
पंजाब में बेअदबी के खिलाफ कानून की नई इबारत: राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब दोषियों के लिए उम्रकैद का रास्ता साफ
पंजाब की राजनीति और धार्मिक संवेदनशीलता के केंद्र में रहे बेअदबी के मुद्दे पर मान सरकार ने एक ऐतिहासिक कानूनी बढ़त हासिल कर ली है। राज्य के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया द्वारा बेअदबी विरोधी विधेयक को मंजूरी दिए जाने के साथ ही अब पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करना एक अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आ गया है। इस नए कानून के तहत अब दोषियों को न केवल उम्रकैद की सजा भुगतनी होगी, बल्कि उन पर 25 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। राज्यपाल की इस मुहर ने न केवल आम आदमी पार्टी की सरकार को एक बड़ी नैतिक जीत दिलाई है, बल्कि विपक्षी दलों को भी रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है।
इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के तुरंत बाद पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने जानबूझकर बेअदबी के मामलों में कमजोर कानून बनाए थे ताकि वे एक-दूसरे के हितों की रक्षा कर सकें। चीमा के अनुसार, विपक्ष ने लगातार मान सरकार के इस विधेयक का विरोध किया, लेकिन राज्यपाल की सहमति ने विरोधियों के 'झूठे और भ्रामक प्रचार' को करारी शिकस्त दी है। सरकार का तर्क है कि भारतीय न्याय संहिता के मौजूदा प्रावधान गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता की रक्षा के लिए पर्याप्त नहीं थे, इसलिए इस विशेष संशोधन की आवश्यकता पड़ी।
कानूनी बारीकियों पर नजर डालें तो यह कानून अत्यंत व्यापक और सख्त है। शांति भंग करने या सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के उद्देश्य से की गई किसी भी आपराधिक साजिश के मामलों में सजा की अवधि 10 साल से लेकर उम्रकैद तक तय की गई है। इसके साथ ही 5 लाख से 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है। यदि कोई व्यक्ति बेअदबी करने का प्रयास भी करता है, तो उसे तीन से पांच साल की जेल और एक से तीन लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। कानून ने बेअदबी की परिभाषा को भी विस्तार दिया है, जिसमें नुकसान पहुंचाना, जलाना, फाड़ना, चोरी करना या मौखिक, लिखित और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से धार्मिक भावनाओं को आहत करना शामिल है।
इस कानून का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की नई भूमिका है। अब SGPC को गुरु ग्रंथ साहिब के सभी 'स्वरूपों' का एक केंद्रीय रजिस्टर बनाए रखना अनिवार्य होगा। इस डेटाबेस में प्रत्येक स्वरूप की विशिष्ट पहचान संख्या, मुद्रण और वितरण का विवरण, भंडारण स्थान और रखरखवा करने वाले व्यक्ति की जानकारी भौतिक और डिजिटल दोनों स्वरूपों में दर्ज होगी। सेवादारों और संरक्षकों को सिखों की आचार संहिता (सिख मर्यादा) का कड़ाई से पालन करना होगा, और किसी भी उल्लंघन पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
पंजाब में बेअदबी एक ऐसा घाव रहा है जिसने पिछले एक दशक में कई राजनीतिक उथल-पुथल देखी है। साल 2016 में SAD-BJP और 2018 में कांग्रेस सरकार द्वारा भी सख्त कानून बनाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन उन्हें राष्ट्रपति की सहमति नहीं मिल पाई थी। मान सरकार ने इन कानूनी बाधाओं को पार करते हुए इस विधेयक को कानून में तब्दील करवाकर एक बड़ा संदेश दिया है। यह नया कानून न केवल दोषियों को सख्त सजा दिलाने का वादा करता है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत निवारक के रूप में भी कार्य करेगा। राज्य की शांति और सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसे एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
